भारतीय वायुसेना के बढ़ते दबदबे और विशेष रूप से 'अभेद्य' S-400 ट्राइंफ (Triumf) एयर डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने पाकिस्तान की रणनीतिक नीतियां हिला कर रख दी हैं।
हाल ही में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव में अपनी करारी हार और F-16 विमानों के नुकसान के बाद, पाकिस्तानी वायुसेना अब तेजी से बदलते क्षेत्रीय हवाई युद्ध के समीकरणों में अपने पुराने हो चुके अमेरिकी लड़ाकू विमानों की अहमियत बचाने की जद्दोजहद में जुट गई है।
इसी बौखलाहट में पाकिस्तान ने अमेरिका से अपने F-16 बेड़े के लिए बेहद घातक माने जाने वाले AIM-120C-8 AMRAAM (एडवांस्ड मीडियम-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइल) की मांग की है।
खुले स्रोतों से प्राप्त हालिया जानकारी के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग ने हथियार निर्माता कंपनी रेथियॉन (Raytheon) के एक 2.5 बिलियन डॉलर के बड़े मिसाइल कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी है। साल 2030 तक पूरी होने वाली इन उन्नत मिसाइलों (C-8 और D-3 वेरिएंट) की विदेशी सैन्य बिक्री (FMS) सूची में पाकिस्तान का नाम भी शामिल किया गया है।
S-400 का खौफ: पाकिस्तान को क्यों महसूस हुई इस मिसाइल की जरूरत?
पिछले साल के सैन्य टकराव के दौरान भारत के इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस नेटवर्क ने जो कहर बरपाया था, उसे पाकिस्तान भूल नहीं पाया है।उस संघर्ष में पाकिस्तान का कम से कम एक F-16 विमान हवा में मार गिराया गया था, जबकि भारतीय वायुसेना के हमलों में जमीन पर खड़े कई अन्य विमानों को भी भारी नुकसान पहुंचा था।
रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस दौरान भारत का S-400 सिस्टम पाकिस्तानी विमानों पर भारी दबाव बनाने में सबसे अहम कारक बनकर उभरा।
वर्तमान में पाकिस्तान के पास साल 2010 के आसपास F-16 ब्लॉक 52 विमानों के साथ खरीदे गए पुरानी तकनीक वाले करीब 500 AIM-120C-5 मिसाइल मौजूद हैं।
एक दशक पहले ये मिसाइल बेहद मारक माने जाते थे, लेकिन आधुनिक युद्ध क्षेत्र में, जहां भारत के पास शक्तिशाली इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सिस्टम, एडवांस जैमिंग तकनीक और S-400 जैसी लंबी दूरी की मारक क्षमता मौजूद है, वहां पाकिस्तान का यह पुराना हथियार अपनी धार पूरी तरह खो चुका है।
तकनीक को समझें: पुराने (C-5) और नए (C-8) मिसाइल में क्या अंतर है?
इसे आसान भाषा में इस तरह समझा जा सकता है:पाकिस्तान के मौजूदा मिसाइल (AIM-120C-5) की सबसे बड़ी कमजोरी यह है कि दागने के बाद उसे रास्ते के एक बड़े हिस्से तक उसी F-16 विमान के रडार से दिशा-निर्देश (Target Updates) की आवश्यकता होती है।
इसका मतलब है कि पाकिस्तानी पायलट को मिसाइल दागने के बाद भी कुछ देर तक युद्ध क्षेत्र में रुकना पड़ता है।
भारत के S-400 रडार की नजर इतनी तेज है कि जैसे ही कोई F-16 यह मिसाइल दागने के लिए सामने आएगा, S-400 पलक झपकते ही उसे आसमान में ही राख कर देगा।
यही कारण है कि पाकिस्तान अब नई AIM-120C-8 कॉन्फ़िगरेशन चाहता है।
ओपन-सोर्स डेटा के अनुसार, जहां पुराने मिसाइल की मारक क्षमता लगभग 105 किलोमीटर है, वहीं नए मिसाइल की रेंज 160 किलोमीटर से भी अधिक है। लेकिन इसमें सबसे बड़ा गेम-चेंजर 'लिंक 16 (Link 16)' टू-वे डेटा-लिंक तकनीक है।
इसका अर्थ यह है कि अब F-16 विमान सुरक्षित दूरी (स्टैंड-ऑफ डिस्टेंस) से यह मिसाइल दागकर तुरंत पीछे मुड़कर भाग सकता है।
दागे जाने के बाद बीच रास्ते में उस मिसाइल को हवा में मौजूद पाकिस्तानी अवाक्स (AWACS) विमान या किसी अन्य रडार से लाइव दिशा-निर्देश मिलते रहेंगे।
इससे पाकिस्तानी F-16 के बचने की संभावना काफी बढ़ जाएगी।
चीन की ओर बढ़ता झुकाव और संतुलन की कोशिश
पाकिस्तान की इस नई मांग के पीछे एक बड़ा कारण उनकी वायुसेना के भीतर हो रहा ढांचागत बदलाव भी है।पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तानी वायुसेना मुख्य रूप से चीनी हथियारों पर निर्भर हो गई है। उनके बेड़े में अब चीनी JF-17 ब्लॉक III और J-10CE लड़ाकू विमान शामिल हो चुके हैं, जो चीन निर्मित लंबी दूरी की PL-15E मिसाइलों से लैस हैं।
इस चीनी प्रभाव ने एक अजीब स्थिति पैदा कर दी है, जहां पाकिस्तान की सबसे उन्नत हवाई मारक क्षमता उसके पारंपरिक 'एलीट' अमेरिकी F-16 बेड़े से छिनकर चीनी प्लेटफॉर्म्स के पास चली गई है।
AIM-120C-8 मिसाइल हासिल करके पाकिस्तान अपने F-16 बेड़े का आधुनिकीकरण करना चाहता है ताकि वह आधुनिक नेटवर्क-केंद्रित युद्ध (Network-Centric Warfare) के मानकों पर खरा उतर सके।
भारतीय रक्षा की अजेय तैयारी
भले ही पाकिस्तान उन्नत AMRAAM मिसाइलें हासिल करने की जुगत लगा ले, लेकिन भारत का बहुस्तरीय (Layered) रक्षा ढांचा आज दुनिया के सबसे ताकतवर सुरक्षा चक्रों में से एक है।भारतीय वायुसेना न केवल S-400 से लैस है, बल्कि हमारे पास स्वदेशी लंबे रडार नेटवर्क, अचूक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम और घातक लड़ाकू विमानों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र मौजूद है।
इसके अतिरिक्त, भारत तेजी से अपने स्वदेशी 'अस्त्र' (Astra Mk-1) बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रहा है और भविष्य की चुनौतियों को ध्वस्त करने के लिए और भी अधिक मारक क्षमता वाले Astra Mk-2 (तथा भविष्य के Mk-3) के विकास पर युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।
फ्रांस से मिली मेटियोर (Meteor) मिसाइलों और रूस की उन्नत R-77 के साथ, भारतीय वायुसेना किसी भी 'स्टैंड-ऑफ' युद्ध या लंबी दूरी की मिसाइल जंग में अपना निर्विवाद वर्चस्व कायम रखने के लिए पूरी तरह तैयार है।