हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने देश के रक्षा क्षेत्र को गौरवान्वित करने वाली एक बड़ी खबर दी है। भारत के अगली पीढ़ी के लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) 'तेजस एमके-2' (Tejas Mk2) के पहले प्रोटोटाइप का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है।
2026 के फारनबोरो इंटरनेशनल एयरशो में HAL के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक रवि कुमार ने यह पुष्टि की है कि इस महात्वाकांक्षी स्वदेशी फाइटर जेट की पहली उड़ान मार्च और जुलाई 2027 के बीच होने की उम्मीद है।
यह केवल एक विमान नहीं है, बल्कि 'आत्मनिर्भर भारत' की ओर बढ़ता एक शक्तिशाली कदम है, जो हमारी वायु सेना की ताकत को एक नए स्तर पर ले जाएगा।
कंप्यूटर स्क्रीन से हकीकत की ओर (प्रोटोटाइप असेंबली का महत्व)
वर्तमान में, यह विमान डिजाइन के चरण से निकलकर उड़ान परीक्षण के बेहद अहम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है।असेंबली का मतलब है कि अब विमान केवल कंप्यूटर मॉडल नहीं रहा; इसके असली पुर्जे—जैसे ढांचे, हाइड्रोलिक सिस्टम, वायरिंग, लैंडिंग गियर और इंजन—एक साथ जोड़े जा रहे हैं।
एक बार जब यह ढांचा पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तो इसके कई कड़े जमीनी परीक्षण (जैसे इंजन रन और टैक्सी ट्रायल) होंगे, जिसके बाद ही इसे अपनी पहली ऐतिहासिक उड़ान की मंजूरी मिलेगी।
तेजस एमके-2: एमके-1ए से कितना अलग और कितना घातक?
यह विमान अपने पिछले संस्करण (Tejas Mk1A) का केवल एक छोटा अपडेट नहीं है, बल्कि यह एक पूरी तरह से नई और बड़ी मशीन है।इसे 'मीडियम वेट फाइटर' (MWF) की श्रेणी में रखा गया है।
- ज्यादा ताकतवर इंजन: इसमें अमेरिका के सहयोग से भारत में ही बनने वाला अत्याधुनिक GE Aerospace F414-INS6 इंजन लगाया जा रहा है, जो 98 kN का भारी थ्रस्ट (धक्का) पैदा करता है। यह विमान को तेज रफ्तार और ज्यादा पेलोड उठाने की ताकत देगा।
- कनार्ड्स (Canards) का कमाल: इसके डिजाइन में मुख्य पंखों के ठीक आगे छोटे पंख (कनार्ड्स) लगाए गए हैं। आसान भाषा में समझें तो, ये छोटे पंख हवा को चीरते हुए विमान को अचानक मुड़ने, तेजी से ऊपर उठने और दुश्मन की मिसाइलों से बचने में अभूतपूर्व फुर्ती प्रदान करते हैं।
- हथियारों का जखीरा: खुले स्रोतों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस 17.5-टन वजनी फाइटर जेट में कुल 11 हार्डप्वाइंट्स (हथियार टांगने की जगह) दिए गए हैं, जो 6.5 टन तक का पेलोड ले जा सकते हैं। यह स्वदेशी अस्त्र (Astra) बियॉन्ड-विजुअल-रेंज मिसाइलों, ब्रह्मोस-एनजी (BrahMos-NG) और स्वदेशी एंटी-रेडिएशन मिसाइल 'रुद्रम' जैसे घातक हथियारों से लैस होगा।
स्वदेशी तकनीक का मास्टरमाइंड: उत्तम रडार
तेजस एमके-2 की सबसे बड़ी ताकत इसका दिमाग है, यानी इसका स्वदेशी उत्तम AESA रडार।यह रडार एक साथ 50 से अधिक लक्ष्यों पर नज़र रख सकता है और एक ही समय में 4 अलग-अलग निशानों पर अचूक हमला कर सकता है।
इसके साथ ही, इसमें एक उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) सूट होगा जो दुश्मन के रडार को जाम कर देगा और उसे हवा में चकमा देने में माहिर होगा।
भारतीय वायु सेना के लिए रणनीतिक अहमियत
भारतीय वायु सेना के लिए यह प्रोग्राम संजीवनी के समान है। आने वाले दशकों में मिराज 2000, जगुआर और मिग-29 जैसे पुराने हो रहे लड़ाकू विमानों के रिटायर होने पर, तेजस एमके-2 उनकी जगह लेगा और भारत की defence जरूरतों को पूरा करेगा।इसके अलावा, एमके-2 परियोजना भारत के भविष्य के 5वीं पीढ़ी के स्टेल्थ फाइटर, एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), के लिए एक महत्वपूर्ण 'टेस्टिंग ग्राउंड' का काम कर रही है।
एमके-2 के लिए विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक सेंसर, सॉफ्टवेयर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियां सीधे तौर पर AMCA प्रोग्राम को फायदा पहुंचाएंगी।
हालांकि मार्च से जुलाई 2027 की समयसीमा एक अनुमानित लक्ष्य है, लेकिन जमीनी परीक्षणों की सफलता के आधार पर इसमें मामूली बदलाव हो सकते हैं।
फिर भी, तेजस एमके-2 का निर्माण यह साबित करता है कि भारतीय एयरोस्पेस इंजीनियरिंग अब विश्व स्तर की जटिल रक्षा तकनीकों को अपने दम पर साकार करने में पूरी तरह सक्षम है।
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