भारत की 'ब्रह्मोस' सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारतीय रक्षा बेड़े का वह अमोघ अस्त्र है, जिसका नाम सुनते ही दुश्मनों के पसीने छूट जाते हैं।
इसकी अचूक सटीकता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह मिसाइल 'पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय की खिड़की' से सीधे अंदर घुसकर अपने लक्ष्य को नेस्तनाबूत करने की क्षमता रखती है।
यह दावा पूर्व भारतीय सेना प्रमुख जनरल जे.जे. सिंह (सेवानिवृत्त) ने किया है, जिनकी देखरेख में 2007 में इस ब्रह्मोस मिसाइल को पहली बार भारतीय सेना में शामिल किया गया था।
जनरल सिंह ने पोखरण में हुए ब्रह्मोस के शुरुआती परीक्षणों को याद करते हुए बताया कि विकास के चरण में ही इस मिसाइल ने अपनी बेजोड़ सटीकता साबित कर दी थी।
उन्होंने पाकिस्तान के पीएम कार्यालय का उदाहरण किसी ऑपरेशनल टारगेट या हमले की योजना के तहत नहीं, बल्कि केवल इस मिसाइल की अद्भुत मारक क्षमता (Pinpoint Precision) को समझाने के लिए दिया था।
कलाम साहब का वह ऐतिहासिक तोहफा
पूर्व सेना प्रमुख ने उस गौरवशाली पल को भी याद किया जब भारत के पूर्व राष्ट्रपति और 'मिसाइल मैन' डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने उन्हें भारतीय सेना में इसके शामिल होने की याद में ब्रह्मोस मिसाइल का एक मॉडल भेंट किया था।डॉ. कलाम ने उसी समय यह स्पष्ट कर दिया था कि ब्रह्मोस एक विश्वस्तरीय हथियार है और आने वाले समय में यह हाइपरसोनिक और सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों की दुनिया में एक ग्लोबल लीडर बनकर उभरेगा।
रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर 21 जून 2007 को एक प्रतीकात्मक हैंडओवर के जरिए भारतीय सेना को ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम सौंपने की घोषणा की थी।
भारतीय सेना के लिए कैसे बना 'गेम चेंजर'?
ब्रह्मोस के आने से पहले, भारतीय सेना दुश्मन के इलाके में भीतर तक सटीक हमले (Deep-Strike) करने के लिए मुख्य रूप से लड़ाकू विमानों या भारी रॉकेट आर्टिलरी पर निर्भर थी।हमारी ज्यादातर जमीनी तोपखाने प्रणालियों की मारक क्षमता लगभग 75 किलोमीटर तक सीमित थी। इस सीमा ने सेना को दुश्मन के अहम ठिकानों को निशाना बनाने से रोक रखा था। लेकिन ब्रह्मोस ने इस तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया।
इसे सरल भाषा में समझें तो ब्रह्मोस की ताकत इसके विज्ञान में छिपी है:
- घातक गति: इसमें एक विशेष 'रैमजेट इंजन' (Ramjet Engine) लगा होता है, जो उड़ान के दौरान ही हवा से ऑक्सीजन खींचता है और ईंधन जलाता है। इससे मिसाइल को ध्वनि की गति से लगभग तीन गुना तेज (Mach 2.8 से 3.0 तक) उड़ने की ताकत मिलती है। इसकी गति इतनी तेज है कि दुश्मन का रडार जब तक इसे पकड़ता है, तब तक लक्ष्य राख में बदल चुका होता है।
- चकमा देने की कला: यह मिसाइल हवा में जमीन या समुद्र की सतह के बेहद करीब उड़ान (Low-altitude flight) भर सकती है। इस वजह से यह दुश्मन के एयर-डिफेन्स सिस्टम (Air Defence System) की नज़रों में आसानी से नहीं आती।
- बिना तबाही के सर्जिकल स्ट्राइक: ब्रह्मोस की अचूकता का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब सेना को किसी एक रडार या बंकर को उड़ाने के लिए पूरे इलाके पर बमबारी करने की जरूरत नहीं है। यह मिसाइल आस-पास के आम नागरिकों या ढांचों को नुकसान पहुँचाए बिना, सिर्फ अपने चुने हुए लक्ष्य को भेद सकती है।
2007 से लेकर अब तक: ताकत में हुआ भारी इजाफा
आज का ब्रह्मोस 2007 के मुकाबले कहीं अधिक घातक और बहुआयामी हो चुका है। खुले स्रोतों और रक्षा जगत की नवीनतम जानकारियों के अनुसार:- बढ़ी हुई मारक क्षमता (Extended Range): MTCR का पूर्ण सदस्य बनने के बाद भारत ने स्वदेशी तकनीक से ब्रह्मोस की रेंज 450 किलोमीटर कर दी है। वहीं, हाल ही में इसके एक्सटेंडेड रेंज वर्ज़न का भी सफल परीक्षण किया गया है, जो 800 किलोमीटर से अधिक दूर बैठे दुश्मन को भी तबाह कर सकता है।
- हर मोर्चे पर तैनात: ब्रह्मोस दुनिया की इकलौती ऐसी क्रूज मिसाइल है जिसे जमीन, हवा, समुद्र और पनडुब्बी—यानी चारों प्लेटफॉर्म्स से दागा जा सकता है। भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 (Su-30 MKI) फाइटर जेट्स में इसे सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है, जो हवा से मार करने वाला दुनिया का सबसे खूंखार कॉम्बिनेशन है।
- भविष्य के ब्रह्मास्त्र (BrahMos-NG & Hypersonic): भारत अब ब्रह्मोस के हल्के और उन्नत संस्करण 'BrahMos-NG' (Next Generation) पर तेजी से काम कर रहा है। इसे तेजस (LCA Tejas) जैसे हल्के लड़ाकू विमानों में भी लगाया जा सकेगा। इसके अतिरिक्त, मैक-7 (Mach 7) की अकल्पनीय गति वाले 'ब्रह्मोस-2' हाइपरसोनिक संस्करण का भी विकास किया जा रहा है।
वैश्विक स्तर पर भारत की धाक
भारत की यह तकनीकी महारत आज वैश्विक निर्यात बाजार में भी अपनी धाक जमा रही है।फिलीपींस इस मिसाइल सिस्टम को खरीदने वाला पहला विदेशी देश बन गया है, जिससे दक्षिण चीन सागर में उसकी सैन्य स्थिति काफी मजबूत हुई है। साथ ही इंडोनेशिया समेत कई अन्य देशों ने भी इस ब्रह्मोस प्रणाली को हासिल करने में गहरी दिलचस्पी दिखाई है।
निष्कर्ष के तौर पर, जनरल जे.जे. सिंह की बातें इस तथ्य को प्रमाणित करती हैं कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किए बिना ही दुश्मन को खौफ में रखने (Conventional Deterrence) की भारत की रणनीति में ब्रह्मोस सबसे बड़ा हथियार है।
लगभग दो दशक बाद भी, भारत की यह मिसाइल दुनिया के सबसे बेहतरीन सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम के रूप में अपना दबदबा कायम रखे हुए है।
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