नई दिल्ली, 27 जनवरी। भारत के सैन्य इतिहास में कुछ फैसले ऐसे होते हैं, जो सिर्फ युद्ध नहीं, बल्कि देश की भौगोलिक किस्मत तय कर देते हैं। ऐसा ही एक ऐतिहासिक फैसला लिया था केएम करियप्पा ने, जिन्होंने 1948 में अद्भुत साहस और दूरदृष्टि का परिचय दिया था, तो आज शायद लेह भारत का हिस्सा नहीं होता।
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