टाटा-एयरबस C-295 विमान कार्यक्रम: देश के एयरोस्पेस विनिर्माण में 125 से अधिक MSME की ऐतिहासिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता की उड़ान

टाटा-एयरबस C-295 विमान कार्यक्रम: देश के एयरोस्पेस विनिर्माण में 125 से अधिक MSME की ऐतिहासिक भागीदारी और आत्मनिर्भरता की उड़ान


भारतीय रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक और गौरवशाली अध्याय जुड़ चुका है।

टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (TASL) और एयरबस के संयुक्त तत्वावधान में वडोदरा में तैयार पहले 'मेड इन इंडिया' सी-295 (C-295) सैन्य परिवहन विमान ने अपनी पहली सफल परीक्षण उड़ान पूरी कर ली है।

यह पहला मौका है जब देश के निजी क्षेत्र ने किसी पूर्ण सैन्य विमान का स्वदेशी भूमि पर निर्माण किया है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' के संकल्प को एक नई मजबूती देता है।

रक्षा प्रौद्योगिकी का सरल और सटीक स्वरूप​

एक आधुनिक सैन्य विमान का निर्माण केवल कलपुर्जों को जोड़ना नहीं है, बल्कि यह उच्च स्तरीय इंजीनियरिंग और सटीक विज्ञान का संगम है।

C-295 एक ऐसा ट्विन-टर्बोप्रॉप सामरिक परिवहन विमान है, जो कठिन इलाकों, संकरे और कच्चे रनवे पर भी आसानी से उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है।

इस विमान के ढांचे (Airframe) में 13,000 से अधिक सूक्ष्म पुर्जे और करीब 4,600 सब-असेंबली शामिल होती हैं।

इस परियोजना की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें केवल कलपुर्जों का आयात नहीं हो रहा, बल्कि 'लेबर-आवर इंडिजिनिएशन' (श्रम घंटे की स्वदेशी भागीदारी) पर जोर दिया जा रहा है।

टाटा और एयरबस की इस पहल के तहत जैसे-जैसे उत्पादन आगे बढ़ेगा, 32वें विमान तक पहुंचते-पहुंचते इसमें लगभग 98 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री और विनिर्माण श्रम का उपयोग होने लगेगा।

एमएसएमई (MSMEs) और उद्योगों का सशक्त नेटवर्क​

यह परियोजना केवल एक विमान बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत में एक व्यापक एयरोस्पेस इकोसिस्टम का निर्माण कर रही है।

देश के सात अलग-अलग राज्यों में फैली 125 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) कंपनियाँ इस आपूर्ति श्रृंखला की रीढ़ बन चुकी हैं।
  • हैदराबाद: यहाँ विमान के मुख्य घटकों और बड़े ढाँचों (MCA) को एकीकृत किया जाता है।
  • नागपुर और बेंगलुरु: ये केंद्र उच्च-सटीक मशीनिंग और स्ट्रक्चरल असेंबली के निर्माण में जुटे हैं।
  • वडोदरा: यह देश की पहली निजी क्षेत्र की फाइनल असेंबली लाइन (FAL) है, जहाँ विमानों का अंतिम एकीकरण, सिस्टम परीक्षण और उड़ान परीक्षण संपन्न होता है।

वैश्विक मानकों की ओर कदम और भविष्य की राह​

भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को वैश्विक एयरोस्पेस गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ढालने के लिए एयरबस और टाटा ने भारत में 21 विशेष विनिर्माण प्रक्रियाओं को प्रमाणित किया है।

एक बार भारतीय कंपनियाँ इन कठोर मानकों पर खरी उतर जाती हैं, तो उनके लिए वैश्विक नागरिक और सैन्य विमान बाजार के दरवाजे भी खुल जाते हैं।

इसके साथ ही, इस विमान में भारत में विकसित रक्षा तकनीक जैसे भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) के रडार वार्निंग रिसीवर और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के काउंटरमेजर डिस्पेंसिंग सिस्टम को 'प्लग-एंड-प्ले' के रूप में जोड़ा जा रहा है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत अब आयात पर अपनी निर्भरता कम कर रहा है।

वोधोरा सुविधा से शुरू हुई यह उड़ान न केवल भारतीय वायुसेना (IAF) की रणनीतिक airlift क्षमता को अजेय बनाएगी, बल्कि आने वाले समय में देश को अंतरराष्ट्रीय एयरोस्पेस मानचित्र पर एक महाशक्ति के रूप में स्थापित करेगी।
 
अन्य भाषा में पढ़ें
अंग्रेजी (English)

Featured News

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
27
Messages
27
Members
4
Latest member
SK News Desk
Back
Top