जौनपुर की महिलाएं गोबर से दुबई तक लिख रहीं सफलता की कहानी, एनआरएलएम से आत्मनिर्भरता की नई उड़ान

एनआरएलएम से बदली तस्वीर, जौनपुर की स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर


जौनपुर, 18 फरवरी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के तहत स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं अब आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं। जौनपुर जिले में 15 से अधिक समूहों की 150 से 300 तक महिलाएं गाय के गोबर से दीपक, गमले और अन्य सजावटी व उपयोगी सामान तैयार कर रही हैं।

खास बात यह है कि अब इन महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए स्थानीय बाजारों में भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि एक निर्यातक कंपनी ने उनके उत्पाद खरीदने की सहमति दे दी है। समूह की महिलाओं द्वारा बनाए गए गोबर के दीपक और गमले अब दुबई तक निर्यात किए जाएंगे। इसके लिए महिलाओं को प्रति दीपक न्यूनतम चार रुपए की दर से भुगतान मिलेगा।

वर्तमान में समूह की महिलाएं प्रतिदिन लगभग पांच क्विंटल गाय के गोबर से दीपक तैयार कर रही हैं। मांग बढ़ने के कारण अब रोजाना सात क्विंटल गोबर की आवश्यकता बताई गई है। इससे प्रत्येक महिला की मासिक आय लगभग 6,000 रुपए तक पहुंचने की संभावना है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होगा।

स्वरोजगार उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में बताया कि मिशन का उद्देश्य समूह से जुड़ी ‘दीदियों’ को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के समूह ने एक कंपनी के साथ उनके उत्पाद खरीदने का समझौता किया है, जिससे उनके बनाए सामान की नियमित खपत सुनिश्चित होगी और आय के स्थायी स्रोत विकसित होंगे।

समूह की सदस्य सुनिधि ने बताया कि वर्ष 2020 में उन्होंने 10 महिलाओं को जोड़कर एक स्वयं सहायता समूह बनाया था। बाद में सरकार की ओर से उन्हें 1,10,000 रुपए की सहायता राशि मिली, जिससे उन्होंने काम की शुरुआत की। इसके बाद सभी सदस्यों ने प्रतिदिन 10 रुपए की बचत कर तीन लाख रुपए से अधिक की पूंजी इकट्ठा की और नए कार्य की शुरुआत की। वर्तमान में समूह की 15 टीमें सक्रिय रूप से काम कर रही हैं और गाय के गोबर से दीपक, गमले तथा अन्य उत्पाद तैयार कर रही हैं। उन्होंने बताया कि अब एक कंपनी उनके घर से ही सामान उठाकर ले जाएगी, जिससे उन्हें अतिरिक्त लाभ होगा और बाजार की चिंता नहीं रहेगी।

समूह की एक अन्य सदस्य ऊषा ने कहा कि पहले वे केवल घरेलू कार्यों तक सीमित थीं और कोई रोजगार नहीं था, लेकिन समूह से जुड़ने के बाद वे आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि वह देवी स्वयं सहायता समूह से जुड़ी हैं और सरकार की ओर से दीपक बनाने का कार्य मिला है। शुरुआती चरण में सरकार से 1,25,000 रुपए की सहायता प्राप्त हुई थी, जिससे काम शुरू किया गया। अब समूह से जुड़ी प्रत्येक महिला को हर महीने लगभग 6,000 रुपए की आय होने की उम्मीद है। महिलाओं ने उम्मीद जताई कि इसी तरह समूह से जुड़ी हर ‘दीदी’ को काम मिले और उनकी आजीविका निरंतर चलती रहे।
 

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