पंजाब में अकाली दल ने फूंका चुनावी बिगुल, 17 फरवरी से सुखबीर बादल शुरू करेंगे 'पंजाब बचाओ' जनसंपर्क अभियान

पंजाब: अकाली दल 17 फरवरी से जनसंपर्क कार्यक्रम शुरू करेगा


चंडीगढ़, 12 फरवरी। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने गुरुवार को घोषणा की कि वह अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए लगभग एक महीने में 40 रैलियों के साथ चुनाव प्रचार के पहले चरण की शुरुआत करेगा। चुनाव प्रचार की शुरुआत गुरदासपुर जिले के कादियान कस्बे में 17 फरवरी से जनसंपर्क कार्यक्रम के साथ होगी। पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने वरिष्ठ पार्टी नेतृत्व से परामर्श के बाद यह निर्णय लिया।

इस विषय पर बोलते हुए बादल ने कहा कि हम पंजाब के सभी ज्वलंत मुद्दों को उठाएंगे और राज्य के लिए अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे। मुझे विश्वास है कि पंजाबी एसएडी के साथ एकजुट होंगे, जो केवल उनकी आकांक्षाओं को पूरा करने में सक्षम है।

वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने बताया कि इसमें राज्य भर में 'पंजाब बचाओ - सुखबीर सिंह बादल लियाओ' नाम से 40 रैलियां आयोजित करना शामिल होगा, जो 13 अप्रैल को बैसाखी के दिन समाप्त होंगी।

उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक 28 रैलियां आयोजित की जाएंगी। उन्होंने आगे कहा कि शेष 12 रैलियां अप्रैल में आयोजित की जाएंगी।

चीमा ने कहा कि पार्टी हमेशा से नैतिक राजनीति का पालन करती आई है।

चीमा ने कहा कि हमने अतीत में जो वादे किए हैं, उन पर हम हमेशा कायम रहे हैं। इस बार भी हम राज्य के लिए अपना दृष्टिकोण प्रस्तुत करेंगे, जो समाज के हर वर्ग को शामिल करेगा, साथ ही शांति और सांप्रदायिक सद्भाव बनाए रखने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।

अकाली दल के नेता ने कहा कि पार्टी महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपना रुख स्पष्ट करेगी और उनके समाधान के लिए अपनी प्रतिबद्धता दिखाएगी।

उन्होंने कहा कि इनमें पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ को राज्य में स्थानांतरित करना और नदियों के पानी के संबंध में पंजाब के साथ हो रहे भेदभाव को समाप्त करना शामिल है।

चीमा ने कहा कि संघवाद के कमजोर होने से पंजाब को आर्थिक रूप से भी नुकसान हुआ है, क्योंकि इसमें केंद्रीय निधियों का हस्तांतरण और राज्यों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार उन्हें खर्च करने की स्वतंत्रता का हनन शामिल है।

चीमा ने कहा कि कृषि संकट और किसानों द्वारा सामना की जा रही गंभीर समस्याओं, जिनमें कर्ज और आत्महत्याएं शामिल हैं, साथ ही 2025 की बाढ़ से हुए नुकसान के लिए मुआवजा न मिलने से किसानों को हो रही पीड़ा को रैलियों में उठाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी बनाना, उर्वरक सब्सिडी में कमी करना और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में किसानों के हितों की रक्षा करना जैसे मुद्दों को जनसंपर्क कार्यक्रम के दौरान उठाया जाएगा।
 

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