मुंबई, 11 फरवरी। देश की कई बड़ी बैंक यूनियनों ने गुरुवार को हड़ताल का ऐलान किया है। इसका बैंकिंग सेवाओं पर असर देखने को मिल सकता है। यह जानकारी बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से बुधवार को दी गई।
एक्सचेंज फाइलिंग में बैंक ऑफ बड़ौदा ने कहा कि कई बैंक यूनियनों ने 12 फरवरी को कई मुद्दों और मांगों को लेकर हड़ताल का ऐलान किया है और इससे सेवाओं में व्यवधान देखने को मिल सकता है।
फाइलिंग में आगे कहा गया कि ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन (एआईबीईए), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (एआईबीओए) और बैंक एम्पलाइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीईएफआई) ने मिलकर संयुक्त रूप से हड़ताल का ऐलान किया है।
बैंक ऑफ बड़ौदा ने आगे बताया कि बैंक हड़ताल के दिन वह अपनी शाखाओं और कार्यालयों के सुचारू संचालन के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रहा है। हड़ताल होने की स्थिति में, शाखाओं और कार्यालयों का कामकाज प्रभावित हो सकता है।
इस हड़ताल में बड़ी बैंकिंग यूनियनों के शामिल होने के कारण कई सरकारी बैंकों जैसे स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और पंजाब नेशनल बैंक के कर्मचारी भाग ले सकते हैं। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से इस दिन किसी प्रकार की किसी छुट्टी का ऐलान नहीं किया गया है।
इस हड़ताल में केवल सरकारी बैंकों के कर्मचारी शामिल हैं, इस वजह से निजी बैंकों जैसे एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, एक्सिस बैंक, आरबीएल बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट जैसे बैंकों में कामकाज सामान्य रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंकिंग यूनियनों के हड़ताल पर जाने की वजह चार नए लेबर कोड्स हैं, जिसे यूनियनों ने कर्मचारी वर्ग बढ़ता बोझ बताया है।
इससे पहले 27 जनवरी को बैंकिंग यूनियनों ने फाइव डे वर्किंग की मांग को लेकर हड़ताल का ऐलान किया था। इस दौरान भी कई सरकारी बैंकों ने पहले ही स्टॉक एक्सचेंज को जानकारी दे दी थी कि हड़ताल की वजह से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ सकता है।
इस हड़ताल का ऐलान यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (यूएफबीयू) ने किया था। यह संगठन नौ बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच है, जो सरकारी बैंकों के अधिकारियों और कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करता है। हड़ताल का फैसला 23 जनवरी को मुख्य श्रम आयुक्त के साथ हुई बैठक में कोई समाधान न निकलने के बाद लिया गया था।
इसमें भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) और बैंक ऑफ बड़ौदा जैसे बड़े सरकारी बैंक शामिल थे।