केनेडी के सेट पर क्यों रहती थी खामोशी? राहुल भट्ट ने खोला राज, बोले- कुछ ऐसा था शूटिंग का अनुभव

'केनेडी' के सेट पर जानबूझकर रखा जाता था शांत माहौल, फिल्म की शूटिंग के अनुभव पर बोले राहुल भट्ट


मुंबई, 11 फरवरी। 20 फरवरी को ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्म 'केनेडी' अपने ट्रेलर लॉन्च से ही सुर्खियों बटोर रही है। सस्पेंस और थ्रिलर से भरी फिल्म में राहुल भट्ट और सनी लियोन सबका दिल जीतने में कामयाब रहे हैं।

'केनेडी' वही फिल्म है जिसे साल 2023 में कान फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित किया गया था और फिल्म को पैनल की तरफ से स्टैंडिंग ऑवेशन भी मिला था। अब फिल्म के मुख्य किरदार राहुल भट्ट और सनी लियोन ने आईएएनएस से फिल्म के बारे में खुलकर बात की है और शूटिंग के अनुभव को भी साझा किया है।

डायरेक्टर अनुराग कश्यप की फिल्मों को क्रूरता से जोड़ने के सवाल पर अभिनेता राहुल भट्ट ने जवाब देते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता कि उनकी फिल्में क्रूरता पर आधारित होती हैं। उनका सिनेमा सच्चाई पर आधारित है, जिसे लोग अक्सर हिंसा कहते हैं। वह कई मायनों में समाज और हमारे भीतर पहले से ही मौजूद है। अगर आप उनकी फिल्मों को ध्यान से देखेंगे, तो पाएंगे कि हिंसा हमेशा पर्दे पर स्पष्ट रूप से नहीं दिखाई जाती। इसका बहुत कुछ दर्शक के मन में घटित होता है। यही उनकी कहानी कहने की कला की खूबसूरती है।"

फिल्म में सनी लियोनी और राहुल भट्ट के डायलॉग से ज्यादा उनके एक्सप्रेशन पर ज्यादा फोकस किया है। इस पर बात करते हुए अभिनेता ने कहा, "अनुराग सर ने मुझे सलाह, कहानियां और शोध सामग्री शेयर की। सेट पर मैं पूरी तरह से उनके मार्गदर्शन में था, और यही सबसे अच्छी बात थी। वे आपको सुरक्षित और सहज महसूस कराते हैं। उनके मार्गदर्शन में आप जो भी करते हैं, वह सही लगता है। चाहे वह डायलॉग हो या सिर्फ एक्सप्रेशन, उनके साथ काम करना एक अविश्वसनीय अनुभव था।"

वहीं इसी सवाल का जवाब देते हुए सनी ने कहा, "अभिनय एक कला है। यह चुप रहने या बहुत सारे संवाद बोलने के बारे में नहीं है। यह किरदार को आत्मसात करने और उस व्यक्ति के वास्तविक स्वरूप को समझने के बारे में है। इस किरदार ने मौन के माध्यम से बहुत कुछ व्यक्त किया। बिना बोले भी उसने बहुत कुछ कह दिया। कई बार आप बहुत सारे संवाद बोल देते हैं, फिर भी कुछ भी व्यक्त नहीं कर पाते। अभिनय अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। यह कभी आसान नहीं होता।"

सेट पर सीन्स को अपनी तरफ से क्रिएटिव बनाने के सवाल पर राहुल ने कहा, "अनुराग से असहमत होना लगभग असंभव है। वह अभिनेताओं को बहुत ज्यादा निर्देश नहीं देते। वह सेट पर बहुत कम बोलते हैं और आपको प्रयोग करने की पूरी आजादी देते हैं। वह ऐसा माहौल बनाते हैं जहां अभिनय स्वाभाविक रूप से प्रवाहित होता है। अगर आप थोड़ा सा भी भटक जाते हैं, तो वह आपको धीरे से वापस सही राह पर ले आते हैं।"

केनेडी के सेट पर जानबूझकर माहौल शांत और गंभीर बनाए रखने के सवाल पर अभिनेता ने कहा, यह बात बिल्कुल सही है। सेट पर खामोशी थी, लेकिन कभी कोई नकारात्मकता नहीं थी। लोग अनावश्यक बातचीत में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान केंद्रित कर रहे थे। हर कोई अपनी जिम्मेदारियों में डूबा हुआ था।

फिल्मों की सफलता को किस पैमाने पर आंकने के सवाल पर राहुल ने कहा, "सफलता किसी एक कारक पर निर्भर नहीं करती। यह सिर्फ फिल्म बनाने और उसे रिलीज करने तक सीमित नहीं है। कई कारण फिल्म की सफलता में योगदान देते हैं। बेशक, अगर कहानी दमदार हो, तो फिल्म बड़ी ऊंचाइयों को छू सकती है। लेकिन कई चीजें मिलकर यह सुनिश्चित करती हैं कि लोगों की आवाजें और कहानियां सुनी जाएं।"
 

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