विहिप के विनोद बंसल का बड़ा बयान: आज भी कुछ लोगों के मन में जिंदा है विभाजनकारी सोच, दुर्भाग्यपूर्ण

'वंदे मातरम' अनिवार्य करने के फैसले का विहिप ने किया समर्थन, विनोद बंसल ने कहा– सराहनीय कदम


नई दिल्ली, 11 फरवरी। केंद्र सरकार ने बुधवार को 'वंदे मातरम' के गायन को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसके लिए एक आधिकारिक प्रोटोकॉल भी तैयार किया गया है, ताकि स्कूलों, कार्यालयों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसे सही तरीके से गाया जा सके। इस कदम का स्वागत विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने करते हुए इसे ऐतिहासिक और सराहनीय बताया है।

विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने कहा कि यह फैसला बहुत जरूरी और स्वागत योग्य है। उनका कहना है कि 'वंदे मातरम' सिर्फ एक गीत नहीं है, बल्कि यह पूरे देश को जोड़ने और देशभक्ति की भावना जगाने वाला एक शक्तिशाली माध्यम है। उन्होंने कहा कि इस गीत ने आजादी के आंदोलन में देशवासियों को एकजुट किया और उन्हें अपने जीवन का सर्वोच्च बल राष्ट्र के लिए समर्पित करने की प्रेरणा दी।

विनोद बंसल ने यह भी कहा कि हालांकि यह देश का दुर्भाग्य है कि कुछ लोगों के मन में आज भी विभाजनकारी सोच जिंदा है, लेकिन सरकार ने इसे अनिवार्य बनाकर सही कदम उठाया है। उनका कहना है कि अब देशभर के लोग, खासकर नई पीढ़ी, इसे पूरे मनोयोग से गाएंगे और राष्ट्रप्रेम की भावना को महसूस करेंगे।

गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ मनाए जाने के दौरान सरकार ने यह फैसला लिया है। विनोद बंसल ने इसे बहुत ही खास अवसर बताया और कहा कि इस गीत के महत्व को हर किसी तक पहुंचाने का यह सही समय है। उन्होंने सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि यह न केवल राष्ट्र की प्रेरणा को बढ़ाएगा बल्कि देशवासियों को एक साझा पहचान और गौरव की भावना भी देगा।

अब देश में 'वंदे मातरम' को गाने का तरीका तय हो गया है और यह सब जगह नियमबद्ध ढंग से गाया जाएगा। इससे बच्चे, युवा और बड़े सभी इसे सही स्वर में और सम्मान के साथ गाएंगे। बंसल ने कहा कि यह कदम देश को जोड़ने और राष्ट्रप्रेम को मजबूत करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
 

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