कोलकाता, 6 फरवरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को सवाल उठाया कि क्या अंतरिम (वोट ऑन अकाउंट) बजट में राज्य सरकार की विभिन्न कल्याण योजनाओं के लिए बढ़ी हुई राशि की घोषणा करना व्यावहारिक है? यह बजट गुरुवार को राज्य वित्त मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) चंद्रिमा भट्टाचार्य ने विधानसभा में पेश किया था।
उनके अनुसार, राज्य सरकार अंतरिम बजट में न तो कल्याण योजनाओं के भुगतान में कोई बढ़ोतरी नहीं कर सकती है और न ही इन योजनाओं के तहत लाभार्थियों की संख्या तय कर सकती है।
विपक्षी नेता ने शुक्रवार शाम मीडिया से कहा, “स्वाभाविक रूप से, राज्य सरकार ऐसे योजनाओं के लिए कोई बजटीय आवंटन नहीं कर सकती। दूसरी बात, अंतरिम बजट में इन योजनाओं के तहत घोषित बढ़ी हुई राशि 1 अप्रैल से लागू होगी लेकिन तब तक मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट लागू हो जाएगा, क्योंकि विधानसभा चुनाव की मतदान तिथियां घोषित हो चुकी होंगी। इसलिए असल में, राज्य सरकार ने अंतरिम बजट में ऐसी घोषणाओं के जरिए जनता को भ्रमित किया है।”
उन्होंने यह भी बताया कि वर्तमान राज्य मंत्रिमंडल के पास इन घोषणाओं को लागू करने का कोई अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा, “इसे केवल चुनाव के बाद बने नए मंत्रिमंडल द्वारा विधानसभा में पूर्ण बजट पेश करने के बाद लागू किया जा सकता है। राज्य सरकार ने असल में अंतरिम बजट का उपयोग टीएमसी के चुनावी घोषणा पत्र के रूप में किया है।”
उनके अनुसार, अंतरिम बजट में इस तरह की भ्रामक घोषणाएं जनता को गुमराह करने की कोशिश मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के आगामी विधानसभा चुनावों में हार के डर को दर्शाती हैं।
उन्होंने कहा, “इसी हार के डर के कारण वह पश्चिम बंगाल में विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) का विरोध कर रही हैं। अब, हताशा में, वह अंतरिम बजट में ऐसी भ्रामक घोषणाएं कर रही हैं।”
सुवेंदु अधिकारी ने आगे आरोप लगाया कि जनता को गुमराह करना मुख्यमंत्री का तरीका बन गया है।
उन्होंने कहा कि पहले उन्होंने एनआरसी और सीएए को एक जैसा बताकर ऐसा किया। उन्होंने वक्फ (संशोधन) अधिनियम के लागू होने के मामले में भी यही किया।