अपने दौर से आगे थी अमृता शेरगिल: रंगीन जिंदगी, बोल्ड कैनवास और विवादों का बेबाक मेल

अमृता शेरगिल: कैनवास जितनी रंगीन जिंदगी, विवादों से भी रहा गहरा रिश्ता


नई दिल्ली, 29 जनवरी। 30 जनवरी… यह तारीख भारतीय कला जगत के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसी दिन अमृता शेरगिल का जन्म हुआ था। एक ऐसी कलाकार, जिनकी पेंटिंग्स आज करोड़ों में बिकती हैं और जिनकी जिंदगी खुद किसी बोल्ड कैनवास से कम नहीं थी। अमृता सिर्फ एक पेंटर नहीं थीं, वे खूबसूरती, बगावती तेवर और बेबाकी का ऐसा मेल थीं, जो अपने दौर से कहीं आगे था।

अमृता शेरगिल की कला की जितनी चर्चा होती है, उतनी ही उनकी शख्सियत की भी। तीखी आंखें, आत्मविश्वास से भरा चेहरा और अलग ही अंदाज, वे जहां जाती थीं, लोगों की नजरें ठहर जाती थीं। लेकिन, अमृता कभी सिर्फ अपनी सुंदरता तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने बार-बार साबित किया कि वे देखने में जितनी आकर्षक हैं, सोच में उससे कहीं ज्यादा गहरी और साहसी हैं।

1913 में जन्मी अमृता के पिता सिख विद्वान उमराव सिंह और मां मेरी एंटोनी गोट्समन थीं। इसी वजह से उनके व्यक्तित्व में भारतीय मिट्टी की गंध और यूरोप की आजाद सोच दोनों दिखाई देती हैं। बचपन से ही उन्हें पेंटिंग का शौक था।

पढ़ाई के लिए अमृता पेरिस गईं और वहां के मशहूर इकोले डेस बीक्स-आर्ट्स में कला की शिक्षा ली। पेरिस ने उनकी सोच को और खुला बना दिया। वहां उन्होंने न सिर्फ कला सीखी, बल्कि जीवन को अपनी शर्तों पर जीना भी सीखा। वे रिश्तों, प्रेम और शरीर को लेकर बेहद स्पष्ट और बेबाक थीं, जो उस दौर में अक्सर विवादों की वजह बन जाता था।

अमृता के बनाए गए सेल्फ-पोर्ट्रेट आज भी लोगों को चौंकाते हैं। इन चित्रों में वे खुद को बिना किसी बनावट के पेश करती हैं, कभी आत्मविश्वासी, कभी असमंजस में, तो कभी बिल्कुल निडर। ये पेंटिंग्स बताती हैं कि अमृता खुद से सवाल करने वाली कलाकार थीं, सिर्फ दूसरों को प्रभावित करने वाली नहीं।

यूरोप की चमक-दमक के बावजूद अमृता का मन भारत की ओर खिंचता रहा। जब वे भारत लौटीं, तो उन्होंने गांवों, गरीबों और आम लोगों की जिंदगी को अपने कैनवास पर उतारना शुरू किया। उनकी मशहूर पेंटिंग्स जैसे ब्राइड्स टॉयलेट, थ्री गर्ल्स और विलेज सीन में भारतीय स्त्रियों की चुप पीड़ा, सादगी और भीतर छुपी ताकत साफ दिखाई देती है।

अमृता की जिंदगी में विवाद भी कम नहीं थे। उनके खुले रिश्ते, बोल्ड विचार और समाज की परंपराओं को चुनौती देने वाला रवैया अक्सर चर्चा में रहा। वे आलोचनाओं से डरने वालों में से नहीं थीं। जो महसूस करती थीं, वही जीती थीं और वही पेंट करती थीं।

सिर्फ 28 साल की उम्र में अमृता शेरगिल का निधन हो गया। उनकी मौत भी रहस्य और सवालों से घिरी रही, लेकिन उनके जाने के बाद उनकी कला और शख्सियत और भी बड़ी होती चली गई। आज उन्हें भारत की सबसे महंगी और प्रभावशाली कलाकारों में गिना जाता है। उनकी पेंटिंग्स राष्ट्रीय धरोहर मानी जाती हैं और दुनिया भर में उनकी चर्चा होती है।
 

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