भोपाल, 11 मार्च। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध का पेट्रोलियम पदार्थों की आपूर्ति पर असर नजर आने लगा है। इसी बात को लेकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने चिंता जताते हुए कहा कि दो देश के युद्ध का मध्य प्रदेश के घर-घर पर असर नजर आने लगा है।
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा, "दो दूसरे देशों के बीच चल रहे केवल 10 दिन के युद्ध का असर अब मध्यप्रदेश के घर-घर तक दिखाई देने लगा है। मीडिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रदेश में एलपीजी की आपूर्ति लगभग 30 प्रतिशत तक घट गई है और सरकार को अब उद्योगों व अन्य उपभोक्ताओं की आपूर्ति सीमित करने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं। यह स्थिति केवल एक आपूर्ति संकट नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि सरकार किसी भी आपदा या आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है।"
उन्होंने आगे कहा, "सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर दुनिया के किसी दूसरे कोने में हुई सीमित अवधि की लड़ाई का असर सीधे मध्यप्रदेश की रसोई तक पहुंच सकता है, तो फिर हमारी तैयारी कितनी कमजोर है? क्या सरकार के पास ऐसी कोई दीर्घकालिक योजना नहीं है जिससे संकट की स्थिति में भी जनता को जरूरी चीजों की कमी न झेलनी पड़े?"
एलपीजी गैस और आम आदमी की जरूरत का जिक्र करते हुए कमलनाथ ने कहा कि एलपीजी आज आम नागरिक के जीवन का सबसे आवश्यक हिस्सा बन चुका है। गरीब परिवारों से लेकर मध्यम वर्ग तक हर घर की रसोई इससे चलती है। ऐसे में अगर आपूर्ति 30 प्रतिशत तक घटने की स्थिति बनती है, तो यह केवल प्रशासनिक चुनौती नहीं बल्कि नीतिगत विफलता का संकेत भी है।
पूर्व सीएम ने कहा, "सरकार अक्सर अपनी उपलब्धियों के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन वास्तविकता यह है कि संकट की घड़ी में व्यवस्थाओं की पोल खुल जाती है। यदि केवल दस दिन की अंतरराष्ट्रीय स्थिति से प्रदेश की गैस व्यवस्था डगमगा जाती है, तो कल्पना कीजिए कि किसी बड़े वैश्विक संकट या लंबी आपूर्ति बाधा की स्थिति में क्या होगा।"
कमलनाथ ने आगे कहा है कि किसी भी प्रदेश की वास्तविक संपन्नता और प्रशासनिक क्षमता का आकलन सुख के समय से नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में होता है। जब हालात सामान्य हों तब योजनाएं बनाना आसान होता है, लेकिन जब संकट आता है तभी यह पता चलता है कि सरकार कितनी दूरदर्शी है।
कांग्रेस नेता ने राज्य सरकार को हिदायत भरे अंदाज में कहा कि मध्य प्रदेश सरकार को इस स्थिति से सबक लेना चाहिए। आवश्यक वस्तुओं के लिए मजबूत भंडारण व्यवस्था, वैकल्पिक आपूर्ति प्रणाली और आपातकालीन प्रबंधन योजना तैयार करना सरकार की जिम्मेदारी है। जनता को यह भरोसा होना चाहिए कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, उनकी रसोई और उनका जीवन प्रभावित नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि आज की यह स्थिति एक चेतावनी है। यदि अभी भी सरकार ने इससे सीख नहीं ली, तो भविष्य में कोई भी बड़ा संकट प्रदेश की जनता के लिए और भी अधिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है। जनता को राहत देना सरकार का कर्तव्य है और यह कर्तव्य केवल घोषणाओं से नहीं बल्कि मजबूत तैयारी और दूरदर्शी नीतियों से निभाया जाता है।