कोलकाता, 10 मार्च। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने धर्मतला में पांच दिन का धरना समाप्त करने के बाद पूर्व राज्यपाल डॉ. सी. वी. आनंद बोस से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की।
सीएम ममता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर मुलाकात की जानकारी साझा करते हुए बोस को उनके भविष्य के कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने लिखा, "धर्मतला में हमारे पांच दिन के धरने के खत्म होने के बाद, मैंने कल जाने से पहले पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर सी. वी. आनंद बोस से पर्सनली मिलने के लिए थोड़ा समय निकाला।"
उन्होंने आगे लिखा, "डॉ. बोस एक जानकार और जाने-माने इंसान हैं, और उनके कार्यकाल के दौरान मुझे हमारे राज्य और इसके लोगों की भलाई और तरक्की से जुड़े मामलों पर उनसे बात करने का मौका मिला। मैंने हमेशा इन बातचीत को अहमियत दी है। मैं डॉ. बोस को उनके आगे के सभी कामों के लिए अपनी दिली शुभकामनाएं देती हूं। मुझे यकीन है कि अपनी समझदारी और अनुभव से, वे आने वाले दिनों में भी जो भी ज़िम्मेदारी लेंगे, उसे पूरा करेंगे।"
यह मुलाकात अलिपुर स्थित राज्य अतिथि गृह 'सौजन्य' में हुई, जहां बोस इस्तीफे के बाद ठहरे थे। ममता ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया, लेकिन राजनीतिक संदर्भ में इसकी अहमियत है। सी. वी. आनंद बोस ने 5 मार्च 2026 को अचानक गवर्नर पद से इस्तीफा दिया था, जिसके बाद तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया। ममता ने इस्तीफे को 'राजनीतिक दबाव' और 'अन्याय' बताया था, तथा केंद्र पर आरोप लगाया था कि बोस को धमकाकर हटाया गया। उन्होंने कहा था कि बोस 'धमकी' के कारण इस्तीफा देने को मजबूर हुए और राज भवन को 'बीजेपी कार्यालय' बनाने की कोशिश हुई।
धरना मुख्य रूप से चुनाव आयोग की विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) प्रक्रिया के खिलाफ था, जिसमें मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाए गए। ममता ने दावा किया कि इससे लाखों वैध मतदाताओं (खासकर अल्पसंख्यक और गरीब) के नाम गायब हो गए, जो लोकतंत्र पर हमला है। धरना 6 मार्च से शुरू हुआ और 10 मार्च को समाप्त हुआ, जब सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर संज्ञान लिया और "बंद दरवाजा खुल गया" की बात कही। ममता ने इसे 'जीत' बताया।