कोलकाता, 22 फरवरी। पश्चिम बंगाल में चाहे सत्ता किसी भी दल की रही, लेकिन खरदाहा विधानसभा की जनता ने कभी वाम दल भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का साथ नहीं छोड़ा। दशकों तक इस सीट का प्रतिनिधित्व करने वाली माकपा 2011 के बाद से जीत को तरस रही है। यह आज वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का एक मजबूत किला है, लेकिन भाजपा के अलावा कांग्रेस और माकपा से मिल रही चुनौतियों ने इस बार ममता बनर्जी की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं। जहां भाजपा और कांग्रेस पहली जीत तलाश रही हैं, वहीं माकपा पूरी ताकत के साथ वापसी करने की कोशिश में है।
हुगली नदी के पूर्वी किनारे पर बसा खरदाहा, पश्चिम बंगाल राज्य के उत्तर 24 परगना जिले का एक शहर और नगरपालिका है। यह कोलकाता महानगर विकास प्राधिकरण (केएमडीए) के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र का एक हिस्सा है। प्रारंभ में खारदाह 1877 में स्थापित दक्षिण बैरकपुर और पश्चिम बैरकपुर नगरपालिकाओं का हिस्सा था। दक्षिण बैरकपुर नगरपालिका का नाम बदलकर 1920 में खारदाह नगरपालिका कर दिया गया।
सियालदह-रानाघाट खंड पर एक रेलवे स्टेशन है, जो सोदेपुर और सुकचर (दक्षिण में) और टीटागढ़ (उत्तर में) के बीच स्थित है। रेलवे स्टेशन शहर को दो भागों में विभाजित करता है। पूर्वी भाग को रहारा के नाम से जाना जाता है, जबकि पश्चिमी भाग को खरदाहा के नाम से जाना जाता है। एस्प्लेनेड, हावड़ा स्टेशन और बारासात समेत कोलकाता के अलग-अलग हिस्सों से बसों का आवागमन स्थानीय लोगों के लिए इस क्षेत्र की परिवहन व्यवस्था को संभाले रखता है।
खरदाहा उत्तर में टीटागढ़, पूर्व में पटुलिया और बांदीपुर, दक्षिण में पनिहाटी और पश्चिम में हुगली नदी से घिरा हुआ है। यह क्षेत्र घनी आबादी वाला और शहरी है। खरदाहा में कई धार्मिक स्थल हैं, जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं। खासकर यहां लगने वाला मेला काफी प्रसिद्ध है। खरदाहा में लक्ष्मी नारायण मंदिर और रस मंदिर/श्यामसुंदर मंदिर प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। रहारा में रामकृष्ण मिशन बालकश्रम भी है।
राजनीति के लिहाज से खरदाहा की बात करें तो यहां अब तक 17 विधानसभा चुनाव हुए हैं। लगभग 60 सालों तक वाम दल को जीत मिलती रही और उसके बाद 2011 से तृणमूल कांग्रेस लगातार जीत रही है। 2021 में खरदाहा में काजल सिन्हा ने जीत हासिल की। हालांकि, उसी साल हुए उपचुनाव में टीएमसी से सोवनदेव चटोध्याय विधायक चुने गए।