नई दिल्ली, 20 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (वाईएसआरसीपी) के एमएलसी अनंत उदय भास्कर के खिलाफ चल रही जांच के तरीके पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने निर्देश दिया कि भास्कर के खिलाफ ट्रायल 30 नवंबर तक पूरा किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची व विपुल पंचोली की बेंच ने कहा कि यह साफ तौर पर पुलिस और सत्ता के गठजोड़ का मामला है। जांच एजेंसी ने भास्कर को बेल दिलाने की कोशिश की।
कोर्ट ने कहा, "यह पुलिस और सत्ता के सांठगांठ का साफ मामला है। पुलिस व जांच एजेंसियां आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही हैं और याचिका दाखिल करने वाले (आरोपी) को 167(2) सीआरपीसी के तहत डिफॉल्ट बेल देने की पूरी कोशिश की गई। हालांकि हाई कोर्ट ने ऐसा नहीं किया।"
सीजेआई ने कहा कि अनंत उदय भास्कर पिछले दो साल से अंतरिम बेल का फायदा उठा रहे हैं। अदालत को व्यक्तिगत स्वतंत्रता और निष्पक्ष ट्रायल के बीच संतुलन बनाना होगा। कोर्ट ने कहा, "यह राज्य पुलिस की मिलीभगत नहीं तो लापरवाही दिखाता है, जिसमें आरोपी ने एक जघन्य अपराध की जांच के मामले में बहुत बड़ी लापरवाही दिखाई है।"
सुप्रीम कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से ट्रायल को एक सीनियर ज्यूडिशियल ऑफिसर को सौंपने का अनुरोध किया।
इसके अलावा, आरोप तय करने का मुद्दा 18 अप्रैल 2026 से पहले तय करने और आरोप तय होने के बाद साक्ष्यों की जांच जल्द पूरी करने के निर्देश दिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आगे की जांच आवश्यक हो तो 31 मार्च 2026 तक पूरी की जाए।
यह भी निर्देश दिए गए कि चार्ज तय होने के बाद, सबूतों की जांच पूरी होनी चाहिए और ट्रायल 30 नवंबर से पहले खत्म होना चाहिए। बेंच ने आगे कहा, "ट्रायल जज को अन्य मामलों से मुक्त रखा जाए ताकि इस केस को प्राथमिकता दी जा सके। साथ ही, ट्रायल पर रोक लगाने का कोई आदेश पारित न किया जाए।"