जीतू पटवारी का हमला: मध्य प्रदेश सरकार का बजट जनता को ठगने वाला, पिछली योजनाओं का पैसा कहां गया?

मध्य प्रदेश सरकार का बजट लोगों को ठगने वाला: जीतू पटवारी


भोपाल, 18 फरवरी। मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार का तीसरा बजट वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बुधवार को विधानसभा में पेश किया। सरकार का दावा है कि इस बजट में सभी वर्गों पर विशेष ध्यान दिया गया है, हालांकि विपक्ष ने सरकार के बजट पर निराशा व्यक्त की। कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि यह बजट जनता को ठगने वाला है।

भोपाल में आईएएनएस से बातचीत में कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने कहा कि सरकार ने भारी-भरकम बजट पेश किया है, लेकिन राजकोषीय घाटा कहां से पूरा होगा, यह सरकार को पता नहीं है। पिछली बार जो बजट पेश किया गया था, लेकिन सरकार ने बजट में से 50 प्रतिशत राशि भी खर्च नहीं की। मध्यप्रदेश की 33 योजनाएं बंद हैं, उसके लिए इस बजट में कुछ भी नहीं है। ऐसा लगता है कि मध्यप्रदेश केंद्रशासित प्रदेश है।

जीतू पटवारी ने कहा कि प्रदेश सरकार को कुत्तों की नसबंदी कराने की जगह अपनी सरकार के ‘भ्रष्टाचार’ की नसबंदी करनी चाहिए, तभी यह प्रदेश आर्थिक आपातकाल से बाहर आएगा। आज का बजट प्रदेश की जनता का खून चूसने वाला बजट है।

कांग्रेस नेता उमंग सिंघार ने कहा कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि प्रदेश का राजकोषीय घाटा 74,000 करोड़ रुपए से अधिक होगा। जब खजाना खाली है, तो बजट में गिनाए गए वादों का आधार क्या है? बजट में न किसानों की आय दोगुनी करने की बात, न युवाओं को रोजगार और न कर्मचारियों के महंगाई भत्ते पर निर्णय लिया गया। जनता से जुड़े मुद्दे पूरी तरह गायब हैं। आम जनता को महंगी बिजली मिल रही है, दरें कम करने की कोई घोषणा नहीं, लेकिन निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

एक्स पोस्ट में उमंग सिंघार ने लिखा कि मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने 4.38 लाख करोड़ रुपए का बजट पेश किया और कबूल किया कि उनकी गलत नीतियों की वजह से प्रदेश पर 6 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है। आज के बजट में सरकार ने यह नहीं बताया कि प्रदेश के हर व्यक्ति पर 60 हजार से ज्यादा का कर्ज है। हर किसान पर लाखों का कर्ज है। वह इससे कैसे निपटेंगे?

विपक्ष का कहना है कि बजट में सरकार ने बताया कि प्रदेश की कमाई का 16 प्रतिशत हिस्सा कर्ज का ब्याज और ब्याज पर लगने वाले ब्याज चुकाने में जाता है जो किसी भी विभाग के बजट से ज्यादा है। सरकार ने 2026 को कृषक कल्याण वर्ष मनाने की घोषणा तो कर दी पर बजट में किसानों के लिए आवंटन नहीं किया। ग्लोबल इन्वेस्टर समिट के नाम पर 33 लाख करोड़ के निवेश का दावा किया जा रहा है, पर पिछले सात इन्वेस्टर समिट में कितना निवेश आया, यह बताने को तैयार नहीं। कितनों को नौकरी मिली, कोई डाटा नहीं है।
 

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