गुटेरेस ने अफ्रीका की हिम्मत सराही, कहा- चुनौतियों से लड़ने में यूएन अफ्रीकी संघ के साथ खड़ा है

यूएन महासचिव ने अफ्रीकी संघ के साथ सहयोग मजबूत करने का दिया आश्वासन


अदीस अबाबा, 15 फरवरी। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि अफ्रीका दुनिया की सबसे कठिन चुनौतियों का सामना हिम्मत, नए विचारों और मजबूती के साथ कर रहा है।

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, इथियोपिया की राजधानी अदीस अबाबा में अफ्रीकी संघ के मुख्यालय में आयोजित 39वें अफ्रीकी संघ शिखर सम्मेलन के दौरान मीडिया से बात करते हुए गुटेरेस ने कहा कि अफ्रीकी देश विकास से जुड़ी समस्याओं को दूर करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई चमत्कार नहीं है, बल्कि असली समस्याओं को हल करने के लिए लगातार और व्यवहारिक काम किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज का अंतरराष्ट्रीय माहौल शीत युद्ध की समाप्ति के बाद के समय से भी ज्यादा बंटा हुआ, अनिश्चित और अस्थिर है।

गुटेरेस ने बताया कि क्षेत्रीय एकता बढ़ाने के प्रयासों से लेकर स्वच्छ ऊर्जा और बुनियादी ढांचे में निवेश तक, अफ्रीका में प्रगति हो रही है। उन्होंने माना कि यह प्रगति हर जगह एक समान नहीं है और कभी-कभी धीमी भी है, लेकिन बदलाव हो रहा है।

उन्होंने अफ्रीका की क्षमता और संभावनाओं की सराहना करते हुए संयुक्त राष्ट्र और अफ्रीकी संघ के बीच पहले से अधिक मजबूत साझेदारी पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस सहयोग की तीन मुख्य प्राथमिकताएं हैं- शांति और सुरक्षा, वित्तीय न्याय और जलवायु परिवर्तन से निपटना।

गुटेरेस ने कहा कि अफ्रीका के कई हिस्से गहरे और जटिल संकटों से जूझ रहे हैं, जिनमें सूडान, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, साहेल क्षेत्र और अफ्रीका का हॉर्न क्षेत्र शामिल हैं। इन संघर्षों में कई पक्ष, कई हित और कई स्तर जुड़े हुए हैं।

उन्होंने कहा कि अफ्रीकी संस्थाएं और नेता महाद्वीप में हिंसा रोकने के लिए काम कर रहे हैं, लेकिन इसके लिए दुनिया से और अधिक सहयोग की जरूरत है। उन्होंने बताया कि कुछ प्रयासों पर जरूरत से ज्यादा दबाव है, कुछ के पास पर्याप्त संसाधन नहीं हैं, और केवल राजनीतिक समर्थन से काम नहीं चल सकता।

गुटेरेस के अनुसार, अफ्रीका में दुनिया की कुछ सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं, लेकिन कई देश भारी वित्तीय दबाव में भी हैं। कर्ज का बोझ, ऊंची ब्याज दरें और लंबी अवधि के वित्त की कमी शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सृजन में बाधा बन रही है।

उन्होंने कहा कि यह बेहद अन्यायपूर्ण है कि उपनिवेशवाद के गहरे जख्म झेलने के बाद भी अफ्रीका को अब भी एक ऐसे वैश्विक आर्थिक और वित्तीय तंत्र से जूझना पड़ रहा है जो पूरी तरह न्यायपूर्ण नहीं है।

गुटेरेस ने जोर देकर कहा कि विकासशील देशों को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में वास्तविक आवाज और प्रभावी भागीदारी मिलनी चाहिए, क्योंकि वही संस्थाएं उनके भविष्य से जुड़े फैसले लेती हैं।

जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि अफ्रीका ने जलवायु परिवर्तन में बहुत कम योगदान दिया है, फिर भी उसे सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। सूखा, बाढ़, भुखमरी और भीषण गर्मी जैसी समस्याएं वहां के लोगों को प्रभावित कर रही हैं।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा कि जलवायु बदलाव के असर से निपटने और स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने के लिए अफ्रीका को पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है। उन्होंने इसे सीधा-सीधा क्लाइमेट के साथ अन्याय बताया और कहा कि सही समर्थन मिलने पर अफ्रीका दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा का बड़ा केंद्र बन सकता है।
 

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