पाकिस्तान का प्रॉक्सी युद्ध बेखौफ जारी, वैश्विक चुप्पी उसे बचा रही; नई रिपोर्ट ने खोली दुनिया की जवाबदेही पर पोल

proxy warfare


इस्लामाबाद, 14 फरवरी। भारत के खिलाफ पाकिस्तान में साजिश रची जाती है फिर भी दुनिया की जिम्मेदार एजेंसियां उन्हें कठघरे में खड़ा नहीं करतीं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यही वजह है कि उनकी हिमाकत बढ़ती है और वो बेखौफ होकर प्रॉक्सी वॉर को अंजाम देते हैं।

शनिवार को एक रिपोर्ट में कहा गया कि भारत को पाकिस्तान-प्रायोजित आतंकवाद का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए काउंटर-टेररिज्म सिस्टम को भी मजबूत करने की जरूरत है और मिलिट्री जवाबी कार्रवाई के अलावा, “ऐसे नॉन-काइनेटिक उपाय अपनाने चाहिए जिससे इस्लामाबाद को भारी कीमत चुकानी पड़े।”

यूरेशिया रिव्यू के लिए पूर्व आर्मी ऑफिसर नीलेश कुंवर ने ये रिपोर्ट लिखी है। उन्होंने यूएन की एक कमेटी को कागज का शेर करार दिया है। कुंवर के अनुसार, “संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध निगरानी समिति बदकिस्मती से सिर्फ एक ‘कागजी शेर’ है जो सदस्य देशों से मिले फीडबैक के आधार पर अपनी रिपोर्ट बनाती है, बिना उसकी जांच किए या कोई निर्देश दिए हुए।"

"इसकी हाल ही में जारी 37वीं रिपोर्ट ने पाकिस्तान के बैन आतंकवादी ग्रुप जैश-ए-मोहम्मद [जेईएम] को 22 अप्रैल, 2025 के पहलगाम हमले और 9 नवंबर, 2025 के लाल किले के सुसाइड कार बॉम्बिंग से जोड़ा है। इसके साथ ही इसमें जेईएम के जमात-उल-मुमिनात का भी जिक्र है। ग्लोबल जिहाद छेड़ने के लिए बनाया गया ये सिर्फ महिलाओं वाली विंग है।" उन्होंने आगे कहा, "हालांकि, यह कहकर कि ये घटनाएं/डेवलपमेंट वही थीं जो 'एक मेंबर स्टेट [मतलब भारत] ने नोट की थीं,' यूएन रिपोर्ट ने अपने रसूख के हिसाब से इस पर अपनी टिप्पणी नहीं दी है।"

रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इस समिति में "दम" नहीं है और यह असरदार नहीं है, फिर भी इसकी रिपोर्ट डिप्लोमैटिक फायदा देती है।

इस मामले में, भारत को निश्चित रूप से फायदा है क्योंकि, इस्लामाबाद के जेईएम के 'खत्म' होने के साफ तौर पर झूठे दावे के उलट, यह एक कमजोर बचाव है—जेईएम की गतिविधियों पर नई दिल्ली के दावों की पुष्टि पक्के सबूतों से होती है, जिन्हें काटा नहीं जा सकता।"

रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के बहावलपुर में टेरर ग्रुप जेईएम के हेडक्वार्टर पर भारत के हवाई हमले से वो तबाह हो गया। इसके बाद ग्रुप में काफी अनबन और असंतोष की खबरें थीं।

रिपोर्ट में सवाल किया गया है, "क्या यह जेईएम चीफ के कबूलनामे के साथ नहीं है कि उसने अपने परिवार के 10 सदस्यों को खो दिया था? क्या इस हमले में इस बात के पक्के सबूत नहीं मिलते कि यूएन द्वारा बैन किया गया आतंकवादी ग्रुप होने के बावजूद, जेईएम न सिर्फ जिंदा है बल्कि आज भी पाकिस्तान में फल-फूल रहा है?"

कुंवर ने कहा, "पिछले साल नवंबर में, भारत की राजधानी के पास फरीदाबाद में अल फलाह यूनिवर्सिटी से चलने वाले एक 'व्हाइट कॉलर' टेरर मॉड्यूल का पता चला, जिसमें ज्यादातर डॉक्टर थे। इससे इस बात का पक्का सबूत मिला है कि जेईएम भारत में आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की लगातार कोशिश कर रहा है, और पिछले साल 10 नवंबर को नई दिल्ली के लाल किले के पास इस मॉड्यूल के एक सदस्य द्वारा किया गया सुसाइड कार बम धमाका जेईएम के खतरनाक इरादों का सबूत है।"
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
6,928
Messages
6,960
Members
18
Latest member
neodermatologist
Back
Top