तुहिन सिन्हा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले- ‘ट्रेड डील किसानों के हित में, भ्रम फैला रहे हैं’

तुहिन सिन्हा का राहुल गांधी पर पलटवार, बोले– ‘ट्रेड डील किसानों के हित में, भ्रम फैला रहे हैं’


मुंबई, 14 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वे लगातार भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं। राहुल गांधी के अमेरिका से ट्रेड डील को किसान विरोधी बताने का उन्‍होंने विरोध किया। उन्‍होंने कहा कि यह डील किसानों के हित में है क्‍योंकि ज्यादातर उत्‍पादों पर शून्‍य टैरिफ है।

उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में कहा, “आज राहुल गांधी ने एक बार फिर देश को गुमराह करने की कोशिश की है। हर दिन वे किसी नए मुद्दे पर झूठी बातें गढ़ते हैं। पिछले आठ दिनों में उन्होंने पहले पूर्व सेना प्रमुख नरवणे की किताब को लेकर भ्रम फैलाया, फिर ट्रेड डील पर बयान दिए और उसके बाद एपस्टीन फाइलों का मुद्दा उठाया। अब वे ट्रेड डील को लेकर जो दावे कर रहे हैं, वे न केवल शरारतपूर्ण हैं, बल्कि देशहित के भी खिलाफ हैं। तथ्यों के साथ इस तरह का खिलवाड़ किसी भी नेता प्रतिपक्ष को शोभा नहीं देता।”

तुहिन सिन्हा ने कहा कि राहुल गांधी यह कह रहे हैं कि प्रस्तावित व्यापार समझौता भारतीय किसानों के विरुद्ध है, जबकि वास्तविकता इसके विपरीत है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में भारतीय स्टेट बैंक की एक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि इस समझौते से अगले एक वर्ष में अमेरिका को होने वाले कृषि निर्यात में 75 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है, क्योंकि अधिकांश उत्पादों पर शून्य टैरिफ की व्यवस्था की गई है। उनके अनुसार, यह समझौता किसानों के हित में है और इससे कृषि क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी।

तुहिन सिन्हा ने महाराष्ट्र के मालेगांव में डिप्टी मेयर के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स और वीडियो में यह दिखाया गया है कि कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाई गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति संविधान के प्रावधानों के तहत उस पद पर बैठा है, क्या उसे ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्व का महिमामंडन करना चाहिए, जिनको लेकर समाज में विवाद रहा है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दलों के पार्षद इस प्रकार के प्रतीकों के जरिए गलत संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। सार्वजनिक पदों पर आसीन जनप्रतिनिधियों को संविधान और राष्ट्र निर्माताओं के आदर्शों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक कार्यालयों में भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी जैसे राष्ट्र पुरुषों और वर्तमान नेतृत्व के प्रतीकों को स्थान दिया जाना चाहिए, जो संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
 

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