उत्तराखंड को राहत! लालढांग-चिल्लरखाल रोड पर SC ने हटाई रोक, अनिल बलूनी की पहल से गढ़वाल का सफर होगा आसान

लालढांग–चिल्लरखाल रोड के बनने का रास्ता साफ, अनिल बलूनी ने सुप्रीम कोर्ट और बांसुरी स्वराज का जताया आभार


नई दिल्ली, 12 फरवरी। उत्तराखंड सांसद अनिल बलूनी के इंटरवेंशन एप्लीकेशन को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है और 2023 से लगा स्टे ऑर्डर हटा दिया है। इससे लालढांग–चिल्लरखाल रोड के बनने का रास्ता साफ हो गया है।

सांसद अनिल बलूनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह गढ़वाल समेत पूरे उत्तराखंड के लिए प्रसन्नता का पल है। गढ़वाल के लोग इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे, लेकिन यह बंद पड़ा हुआ था। लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन दायर की हुई थी। हमारी तरफ से सांसद और वकील बांसुरी स्वराज पेश हुई थीं।

उन्होंने कहा कि हम लोगों ने मांग की थी कि हमारी लाइफलाइन, इस रास्ते को खोला जाए। सुप्रीम कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला लिया है। हम इसके लिए आभार व्यक्त करते हैं। इस रास्ते के खुलने से लोगों को सहूलियत होगी। उत्तराखंड के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए उत्तर प्रदेश से होकर जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।

वहीं, सांसद और वकील बांसुरी स्वराज ने कहा कि 2023 के जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने लालढांग–चिल्लरखाल रोड पर स्टे लगाया था। सांसद अनिल बलूनी ने स्थानीय लोगों के हित के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई और निवेदन किया कि इस सड़क का निर्माण होना चाहिए और इससे किसी भी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि यह सड़क एक जीवनरेखा के रूप में काम करती है। गढ़वाल के अनगिनत गांव इससे जुड़े हुए हैं और हजारों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने इसका संज्ञान लिया और उत्तराखंड को इस सड़क के निर्माण की अनुमति दी है।

अनिल बलूनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इससे संबंधित एक पोस्ट लिखकर बताया कि राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग–चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने मेरे इंटरवेंशन एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए 2023 से लगा स्टे ऑर्डर हटा दिया है। यह फैसला कोटद्वार एवं आसपास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।

उन्होंने आगे लिखा कि उच्चतम न्यायालय में गढ़वाल की जनता का पक्ष रखने के लिए सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ अधिवक्ता एवं नई दिल्ली से सांसद बांसुरी स्वराज, अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव और अधिवक्ता वैभव थलेडी का हार्दिक धन्यवाद।
 
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