मुंबई, 11 फरवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), मुंबई ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए), 2002 के तहत 9 फरवरी 2026 को एक प्रोविजनल अटैचमेंट ऑर्डर (पीएओ) जारी किया है। इसमें बैंक ऑफ इंडिया के निलंबित स्टाफ ऑफिसर हितेश कुमार सिंगला की लगभग 1.03 करोड़ रुपए की संपत्ति और म्यूल अकाउंट्स में जमा बैंक बैलेंस को अटैच किया गया है।
ईडी की जांच सीबीआई और एसीबी मुंबई द्वारा दर्ज एफआईआर पर आधारित है, जिसमें हितेश कुमार सिंगला और अन्य पर आईपीसी की धारा 409, बीएनएस की धारा 316(5), और पीसी एक्ट 1988 की धारा 13(2) रीड विद 13(1)(ए) के तहत आरोप हैं। सिंगला (32 वर्ष) बैंक ऑफ इंडिया की टर्नर रोड, बांद्रा शाखा में स्टाफ ऑफिसर थे।
मई 2023 से जुलाई 2025 तक उन्होंने गलत इरादे से बिना अनुमति के ग्राहकों के टर्म डिपॉजिट (टीडीएस), पब्लिक प्रोविडेंट फंड (पीपीएफ), सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (एससीएसएस), सेविंग्स बैंक और करंट अकाउंट्स को धोखे से बंद कर दिया। कुल 230 अकाउंट्स टारगेट किए गए, खासकर सीनियर सिटीजन, नाबालिग, मृतक ग्राहकों और इनऑपरेटिव/डॉर्मेंट अकाउंट्स को, ताकि धोखाधड़ी का पता न चले। कुल निकाली गई राशि लगभग 16.80 करोड़ रुपए बताई गई है।
इस धन को सिंगला ने अपने पर्सनल सेविंग्स अकाउंट में ट्रांसफर किया। बाद में इसे स्टॉक मार्केट (फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग), रियल मनी गेमिंग वेबसाइट्स, क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किया गया और पर्सनल खर्चों में उड़ा दिया। जांच में पाया गया कि लगभग 90 प्रतिशत राशि ट्रेडिंग, ऑनलाइन गैंबलिंग और क्रिप्टो में गंवा दी गई, जिससे ट्रेसिंग मुश्किल हो गई।
ईडी ने सिंगला को फरार होने पर 17 सितंबर 2025 को अहमदाबाद जंक्शन रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी से पहले 13 घंटे से ज्यादा की मल्टी-स्टेट चेज हुई। गिरफ्तारी के बाद ईडी ने स्पेशल पीएमएलए कोर्ट, ग्रेटर बॉम्बे में प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट दाखिल की, जिस पर 21 जनवरी 2026 को कोर्ट ने संज्ञान लिया। फिलहाल सिंगला न्यायिक हिरासत में हैं और मुंबई की आर्थर रोड जेल में बंद हैं।