नई दिल्ली, 11 फरवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय बजट पर बहस के दौरान राहुल गांधी द्वारा सरकार पर की गई टिप्पणी को आपत्तिजनक और जहरीला बताया। पार्टी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर सदन की गरिमा और मर्यादा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया।
भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने राहुल गांधी के भाषण के तुरंत बाद पार्टी मुख्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री पर की गई तीखी टिप्पणियों से भाजपा सांसद बेहद नाराज हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने झूठ फैलाने का अभियान चलाया और बार-बार गलत आरोप लगाए, जो पूरी तरह पीएम मोदी के प्रति उनकी नफरत और तिरस्कार से प्रेरित थे।
त्रिवेदी ने कहा, “लगातार चुनावी हार से कांग्रेस टूट चुकी है और हताश हो गई है, इसलिए वह बार-बार नाटक कर रही है, जबकि हाल के समय में सदन अध्यक्ष उन्हें कई बार टोक चुके हैं।”
केंद्रीय बजट 2026-27 पर बोलते हुए राहुल गांधी ने दावा किया था कि सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर व्यापार समझौता किया और भारत के हितों से समझौता कर लिया।
इस पर जवाब देते हुए राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश को बेच देने का राहुल का आरोप जहरीले झूठ का पुलिंदा है।
उन्होंने कहा, “इराक के पूर्व राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन के साथ तेल सौदे के दौरान कांग्रेस नेता नटवर सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था। भारत-अमेरिका परमाणु समझौते के दौरान एक कांग्रेस नेता पर पैसे जुटाने के आरोप लगे थे।”
सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस के दौर के उदाहरण गिनाए, जब उनके अपने विदेश मंत्रियों ने रिकॉर्ड पर ‘अमेरिका के तीव्र दबाव’ की बात मानी थी और 1995 में तय भारत के परमाणु परीक्षण भी टाल दिए गए थे।
उन्होंने कहा, “मैं कांग्रेस से पूछना चाहता हूं कि वह हमेशा देश के खिलाफ और विदेशी कंपनियों व संस्थाओं के पक्ष में क्यों खड़ी रहती है। चाहे हॉवित्जर हो, अगस्ता वेस्टलैंड सौदा हो या हिंडनबर्ग, कांग्रेस हमेशा उनके साथ खड़ी रही है।”
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद को पूर्व सेना प्रमुख और प्रकाशक दोनों ने तथ्य-जांच कर गलत ठहराया था, फिर भी वह बेशर्मी से इस मुद्दे को उठाते रहे। राहुल गांधी गलवान पर बोलना चाहते थे, लेकिन बार-बार डोकलाम की बात करते रहे। जब आप दिया गया पाठ पढ़ते हैं तो ऐसा ही होता है।
उन्होंने आगे कहा, “जब डोकलाम की घटना हुई थी, तब न तो जनरल नरवणे सेना प्रमुख थे और न ही राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री।”
उन्होंने कांग्रेस से यह भी पूछा कि नरवणे की किताब को लेकर विवाद क्यों खड़ा किया, जबकि यह आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम और सेना अधिनियम का स्पष्ट उल्लंघन है। उन्होंने याद दिलाया कि 1971 के युद्ध के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और जनरल मानेकशॉ के बीच हुई बातचीत आज भी गोपनीय है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के प्रति व्यक्तिगत नफरत और लगातार चुनावी हार ने नेता प्रतिपक्ष को परेशान और व्यथित कर दिया है। इसी कारण कांग्रेस पार्टी सदन की अनदेखी करने और लंबे समय से चली आ रही संसदीय परंपराओं को कमजोर करने में जुटी हुई है।