ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' को बड़ा झटका, इटली और पोलैंड ने शामिल होने से साफ इनकार किया

Poland and Italy On Board Of Peace


नई दिल्ली, 11 फरवरी। इटली और पोलैंड ने भी डोनाल्ड ट्रंप के सुझाए 'बोर्ड ऑफ पीस' से किनारा करने का फैसला लिया है। वारसॉ और रोम ने बुधवार को इस पर अपना रुख साफ किया। पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने 'मौजूदा हालात' का हवाला दिया तो वहीं इटली ने संवैधानिक चुनौतियों को इनकार की वजह बताया।

विभिन्न मीडिया आउटलेट्स ने इसकी पुष्टि की है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, पोलिश प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने सरकारी बैठक में कहा कि पोलैंड मौजूदा हालात में अमेरिका के नेतृत्व वाले बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं होगा, लेकिन इसका विश्लेषण करता रहेगा।

टस्क ने कहा, "बोर्ड के आकार को लेकर कुछ राष्ट्रीय शंकाओं को ध्यान में रखते हुए पोलैंड बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं होगा, लेकिन हम इसका एनालिसिस करेंगे।"

टस्क बुधवार को नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में अपने विरोधी करोल नॉवरोकी से मिलने वाले थे, जहां बोर्ड ऑफ पीस एजेंडा में था।

वहीं, इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तजानी ने संविधान का हवाला दिया, जिसके मुताबिक देश दूसरे देशों के बराबर शर्तों पर ही अंतर्राष्ट्रीय संस्था में शामिल हो सकता है। रोम का कहना है कि ये शर्त बोर्ड के मौजूदा कानून में फिट नहीं बैठतीं क्योंकि यह ट्रंप को बहुत ज्यादा एग्जीक्यूटिव पावर (कार्यकारिणी शक्ति) देता है।

उन्होंने स्काई टीजी24 न्यूज चैनल से कहा, "हम बोर्ड ऑफ पीस में शामिल नहीं हो सकते क्योंकि इटली के सामने संवैधानिक चुनौती है।"

इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी ने पिछले महीने ही कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप से इटली को शामिल होने लायक बनाने के लिए बोर्ड ऑफ पीस की शर्तों में बदलाव करने का आग्रह किया था।

डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाला बोर्ड ऑफ पीस शुरुआत में एक सीमित उद्देश्य के लिए गढ़ा गया था। इसे पहले विश्व नेताओं के एक छोटे समूह के रूप में तैयार किया गया था। इसका मुख्य मकसद गाजा युद्धविराम योजना की निगरानी करना था। लेकिन फिर बाद में ट्रंप प्रशासन की महत्वाकांक्षाएं इस बोर्ड को लेकर बढ़ गईं। ट्रंप ने इसका दायरा बढ़ाते हुए दर्जनों देशों को न्योता भेजा। संकेत दिया गया है कि भविष्य में यह बोर्ड केवल गाजा तक सीमित न रहकर एक वैश्विक संघर्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।

पाकिस्तान, मिस्र, और तुर्की समेत कई देशों ने न्योता स्वीकारा है, तो फ्रांस, नॉर्वे, स्वीडन, और यूके जैसे देशों ने बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर दिया।
 
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