बस्ती, 10 फरवरी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को जनपद बस्ती में भारत सरकार की स्माइल योजना के तहत ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए नवनिर्मित गरिमा गृह का उद्घाटन कर सामाजिक समावेशन और मानवीय संवेदनशीलता का सशक्त संदेश दिया।
इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि ट्रांसजेंडर समुदाय को सम्मानजनक जीवन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के समान अवसर उपलब्ध कराना सरकार ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। राज्यपाल ने गरिमा गृह परिसर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की जानकारी प्राप्त की और ट्रांसजेंडर समुदाय के अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और सामाजिक सहभागिता को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि समाज का प्रत्येक नागरिक समान अधिकारों का अधिकारी है और ट्रांसजेंडर समुदाय को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सकारात्मक सामाजिक वातावरण का निर्माण आवश्यक है। आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ट्रांसजेंडर समुदाय को प्राथमिकता के आधार पर दिया जाना चाहिए, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें।
आनंदीबेन पटेल ने समाज से अपील की कि ट्रांसजेंडर समुदाय के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव न किया जाए और उन्हें सम्मान तथा स्वीकार्यता प्रदान की जाए। राज्यपाल ने कहा कि ट्रांसजेंडर जन्म से ही होते हैं और यह कोई अपराध या सामाजिक कलंक नहीं है। उन्हें शिक्षा और रोजगार के समान अवसर देकर आत्मनिर्भर बनाना अत्यंत आवश्यक है। बस्ती से शुरू हुई यह पहल समाज में सकारात्मक बदलाव की दिशा में एक सराहनीय कदम है।
उन्होंने परिवार और समाज से अपील करते हुए कहा कि यदि किसी परिवार में ट्रांसजेंडर बच्चा जन्म लेता है, तो उसे सम्मानपूर्वक अपनाया जाए और समाज द्वारा किसी भी प्रकार की टीका-टिप्पणी न की जाए। उन्होंने इसे एक पुण्य कार्य बताते हुए ट्रांसजेंडर समुदाय से शिक्षा ग्रहण कर आगे बढ़ने का आह्वान किया और भरोसा दिलाया कि समाज उन्हें स्वीकार करने के लिए तैयार है।
इस अवसर पर राज्यपाल ने इंदिरा चैरिटेबल ट्रस्ट के अजय पाण्डेय द्वारा ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान उत्तर प्रदेश में ट्रांसजेंडर समुदाय के उत्थान में राज्यपाल के योगदान पर आधारित एक लघु फिल्म भी प्रदर्शित की गई, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। कार्यक्रम में “ट्रांसजेंडर समुदाय एवं समाज” विषय पर एक संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें वरिष्ठ नागरिकों द्वारा पूछे गए प्रश्नों के माध्यम से समावेशी सोच, समान अवसर और सामाजिक संवेदनशीलता पर सार्थक चर्चा हुई।