तिरुवनंतपुरम, 10 फरवरी। केरल की राजधानी के एक पॉश इलाके में हुए करोड़ों रुपए के भूमि घोटाले की जांच एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। इस मामले में सस्थामंगलम की सब-रजिस्ट्रार केएस लक्ष्मी को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उन्होंने जाली दस्तावेजों के जरिए करीब 4.5 करोड़ रुपए मूल्य के मकान और जमीन के फर्जी ट्रांसफर में मदद की।
लक्ष्मी को इस मामले में नौवां आरोपी बनाया गया है।
पुलिस के अनुसार, जवाहरनगर निवासी डोरा फिलहाल विदेश में हैं; उनकी 14.5 सेंट जमीन और एक रिहायशी मकान को पिछले साल जनवरी में जाली दस्तावेज तैयार कर हड़प लिया गया।
आरोप है कि सबसे पहले इस संपत्ति को मनक्कड पुथुपरम्बु की मेरिन जैकब के नाम गिरवी रखा गया। इसके लिए उसे डोरा की गोद ली हुई बेटी बताकर पेश किया गया।
बाद में यह संपत्ति मरुथमकुझी निवासी चंद्रसेनन को जाली बिक्री विलेख के जरिए बेच दी गई।
जांचकर्ताओं का कहना है कि लक्ष्मी ने जाली दस्तावेजों के पंजीकरण में सक्रिय भूमिका निभाई और आरोपियों को जरूरी मदद भी दी। पंजीकरण के दौरान फर्जी पहचान पत्र पेश किए गए।
संदेह से बचने के लिए दस्तावेजों पर हस्ताक्षर सब-रजिस्ट्रार कार्यालय के बाहर कराए गए; कथित तौर पर इसमें लक्ष्मी ने सक्रिय भूमिका निभाई।
पुलिस ने यह भी बताया कि लक्ष्मी ने मुख्य आरोपी और गिरोह के सरगना अनंतपुरी मणिकंदन से सहयोग के बदले 10 लाख रुपए और 10 मोबाइल फोन रिश्वत के तौर पर लिए।
जाली बिक्री डीड में अनंतपुरी मणिकंदन, सैयद अली और सुनील थॉमस को गवाह बताया गया है। इसके अलावा दूसरे आरोपी चंद्रसेनन के दामाद अनिल थंबी का नाम भी गवाह के रूप में दर्ज है।
शुरुआत में लक्ष्मी ने दावा किया था कि पंजीकरण संबंधित पक्षों के पहचान दस्तावेजों की जांच के बाद ही किया गया था।
हालांकि, पुलिस ने कहा कि साइबर सबूत मिलने के बाद उनका यह दावा गलत साबित हो गया।
घोटाले का खुलासा होने के बाद पंजीकरण महानिरीक्षक ने पहले ही लक्ष्मी को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
जांच टीम ने बताया कि उस समय लक्ष्मी द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट मणिकंदन के पक्ष में लग रही थी।
पुलिस ने कहा कि लक्ष्मी से आगे की पूछताछ में लेन-देन का खुलासा होने और इस संगठित संपत्ति घोटाले में शामिल अन्य लोगों के नाम सामने आने की उम्मीद है।