गुवाहाटी, 10 फरवरी। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गौरव गोगोई, भूपेश बघेल और जितेंद्र सिंह अलवर के खिलाफ 500 करोड़ रुपए के हर्जाने की मांग करते हुए सिविल और क्रिमिनल मानहानि का केस किया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में सीएम सरमा ने कहा कि यह केस कांग्रेस की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन पर लगाए गए झूठे, गलत इरादे वाले और बदनाम करने वाले आरोपों के सिलसिले में फाइल किया गया है। उन्होंने दोहराया कि वह पॉलिटिकल दबाव या पब्लिक हमलों से नहीं डरेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हिट-एंड-रन पॉलिटिक्स का जमाना खत्म हो गया है। अगर उनमें जरा भी हिम्मत या सबूत हैं, तो उन्हें हर आरोप को कोर्ट में साबित करना चाहिए।"
केस फाइल करने से कुछ दिन पहले सीएम सरमा ने पब्लिक में ऐलान किया था कि वह आरोपों को लेकर कांग्रेस नेताओं के खिलाफ लीगल एक्शन लेंगे, जिससे उनके सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह के उपाय करने के इरादे का इशारा मिला।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस लीडरशिप पर मिलकर बदनामी करने और पॉलिटिकल ड्रामा करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह हमला गांधी परिवार के कहने पर किया गया था। उन्होंने कहा कि विपक्ष को पर्सनल बुराई के बजाय मुद्दों और गवर्नेंस पर फोकस करना चाहिए।
मुख्यमंत्री का यह कदम राजीव भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आया, जहां कांग्रेस सांसद और लोकसभा में पार्टी के डिप्टी लीडर गौरव गोगोई ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में एक डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया था।
गोगोई ने कहा कि पोर्टल का मकसद सीएम सरमा की पॉलिटिकल जर्नी और गवर्नेंस स्टाइल की जांच करना था। साथ ही, दावा किया कि इसमें मुख्यमंत्री की पब्लिक लाइफ से जुड़े डॉक्यूमेंट्स, वीडियो और दूसरी चीजें हैं।
कांग्रेस नेता ने कहा था कि इस पहल का मकसद असम के लोगों के सामने फैक्ट्स रखना और अकाउंटेबिलिटी को बढ़ावा देना है।
गोगोई ने यह भी ऐलान किया था कि कांग्रेस ने इसी तरह के कंटेंट वाला एक पैम्फलेट जारी किया है, जिसे एक बड़े आउटरीच प्रोग्राम के हिस्से के तौर पर पूरे राज्य में बांटा जाएगा।
गोगोई की बातों को दोहराते हुए बघेल ने जोर देकर कहा था कि ट्रांसपेरेंसी और अकाउंटेबिलिटी डेमोक्रेसी के जरूरी पिलर हैं, खासकर जब असम अहम पॉलिटिकल माइलस्टोन की ओर बढ़ रहा है।