पश्चिम बंगाल चुनाव : हॉटसीट नंदीग्राम, संघर्ष, सियासत और सस्पेंस के बीच भाजपा का पलड़ा 'भारी'

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव: संघर्ष, सियासत और सस्पेंस की सीट नंदीग्राम


नई दिल्ली, 10 फरवरी। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वी मिदनापुर जिले की नंदीग्राम सीट एक बार फिर सियासत के केंद्र में है। यह सीट तमलुक लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है और प्रदेश की राजनीति की दिशा तय करती है। नंदीग्राम-1 और नंदीग्राम-2 विकास खंडों को मिलाकर बनी यह सीट अपने आप में काफी खास है। यह सीट एक शानदार इतिहास, आंदोलन, सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक टकराव की कहानी अपने भीतर समेटे हुए है।

1951 से 1967 तक यह क्षेत्र नंदीग्राम उत्तर और दक्षिण के नाम से दो अलग-अलग विधानसभा सीटों में बंटा था। 1967 में इन दोनों सीटों का विलय हुआ और नंदीग्राम का गठन किया गया। इस सीट ने अब तक 15 विधानसभा चुनाव देखे हैं, जिनमें 2009 का उपचुनाव भी शामिल है।

शुरुआती दशकों में यहां भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) का दबदबा रहा, सीपीआई ने 9 बार इस सीट से जीत दर्ज की। इसके अलावा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने दो-दो बार जीत दर्ज की, जबकि जनता पार्टी ने एक बार जीत हासिल की।

नंदीग्राम की पहचान सबसे ज्यादा 2007 के भूमि आंदोलन से जुड़ी है। वाममोर्चा सरकार द्वारा प्रस्तावित रासायनिक हब के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ ग्रामीणों का बड़ा आंदोलन हुआ। पुलिस कार्रवाई के दौरान 14 लोगों की मौत हो गई। यह घटना तृणमूल कांग्रेस और ममता बनर्जी के लिए निर्णायक मोड़ साबित हुई। नंदीग्राम आंदोलन ने राज्यभर में वाममोर्चा के खिलाफ माहौल बनाया और 2011 में 34 साल पुरानी वाम सरकार सत्ता से बाहर हो गई।

2021 के विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम एक बार फिर उस वक्त सुर्खियों में आया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट छोड़कर यहां से चुनाव लड़ने का फैसला किया। उनका मुकाबला उनके पूर्व सहयोगी और तब भाजपा में शामिल हो चुके सुवेंदु अधिकारी से था। कड़े मुकाबले में ममता बनर्जी को हार का सामना करना पड़ा और भाजपा के सुवेंदु अधिकारी को जीत मिली। इसी के साथ भाजपा ने पहली बार नंदीग्राम में अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराई।

इस चुनाव में भाजपा के सुवेंदु अधिकारी, टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और वाम मोर्चा की मीनाक्षी मुखर्जी के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के दावे किए गए। लेकिन, नतीजों में भाजपा-टीएमसी के बीच ही सीधा मुकाबला दिखा। भाजपा ने 48.49 और टीएमसी ने 47.64 प्रतिशत वोट हासिल किए। जबकि, वाम मोर्चा की प्रत्याशी को सिर्फ 2.74 प्रतिशत मत ही मिले। नंदीग्राम में भाजपा की जीत को बंगाल के 2021 के विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट माना जाता है।

हल्दी (हल्दिया) नदी के दक्षिणी किनारे पर स्थित नंदीग्राम के सामने औद्योगिक शहर हल्दिया है। यह क्षेत्र उपजाऊ कृषि भूमि के लिए जाना जाता है, जहां धान, सब्जियां और मछली का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। नंदीग्राम हल्दिया जैसे शहरी क्षेत्रों को ताजी सब्जियां और कृषि उत्पाद सप्लाई करता है। हालांकि, औद्योगिक विकास सीमित है, लेकिन कृषि, मत्स्य पालन और छोटे व्यापार यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। अधिकांश आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है।

भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका गंगा (भागीरथी) और हल्दी नदी के प्रभाव क्षेत्र में आता है, जिससे भूमि अत्यंत उपजाऊ बनी रहती है। नंदीग्राम कोलकाता से लगभग 70-130 किमी, तमलुक से 33 किमी और हल्दिया से करीब 13 किमी दूर स्थित है। सड़क मार्ग से हल्दिया और तमलुक तक सीधी कनेक्टिविटी है, जबकि सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन महिषादल है। शिक्षा और स्वास्थ्य की बेहतर सुविधाओं के लिए लोगों को हल्दिया या तमलुक जाना पड़ता है।

नंदीग्राम का नाम शिवभक्त ऋषि नंदी के नाम पर माना जाता है, जिसके कारण यहां भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी इस क्षेत्र की भूमिका रही। 1947 से पहले तमलुक क्षेत्र को कुछ समय के लिए अंग्रेजों से मुक्त कराने में नंदीग्राम के लोगों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

नंदीग्राम का राजनीतिक इतिहास संघर्ष और टकराव से भी जुड़ा रहा है। 2007 के आंदोलन के अलावा 2021 विधानसभा चुनाव के दौरान भी यहां हिंसा की घटनाएं सामने आईं। 2024 लोकसभा चुनाव के समय भी भाजपा और तृणमूल कांग्रेस समर्थकों के बीच झड़प, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं हुईं। आगामी विधानसभा चुनाव में नंदीग्राम पर हर किसी की नजरें टिकी हैं। इस सीट पर मुकाबला बेहद रोचक और हाई-प्रोफाइल हो सकता है।
 

Trending Content

Forum statistics

Threads
15,719
Messages
15,756
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top