लखनऊ, 9 फरवरी। विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।
राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है।
राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में 2.96 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर वर्तमान में 6.95 लाख करोड़ रुपए हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है।
बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में 400 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,700 करोड़ रुपए तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय 41,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 1,25,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है।
राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को 3,04,321 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान 2,13,519 करोड़ रुपए से 90,802 करोड़ रुपए अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में 30 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा 76.88 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
आनंदीबेन पटेल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपए की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक 1,484 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है।
उन्होंने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है।
राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को 28,920 करोड़ रुपए का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र 7,712 करोड़ रुपए था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है।
उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने 3,810.63 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जो प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन तंत्र की मजबूती और वित्तीय स्थिरता को दर्शाता है।
सामाजिक सुरक्षा और जनकल्याण के क्षेत्र में हुई प्रगति को रेखांकित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में स्वयं सहायता समूह सामाजिक समावेशन और महिला सशक्तिकरण का सशक्त माध्यम बनकर उभरे हैं। इन समूहों में 64 प्रतिशत से अधिक सदस्य अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) समुदाय से हैं, जबकि 45,611 से अधिक अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिलाएं भी सक्रिय रूप से जुड़ी हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ₹109 करोड़ से अधिक की धनराशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई गई है, जिससे महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता, सामाजिक सहभागिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को उल्लेखनीय मजबूती मिली है।
राज्यपाल ने कहा कि सामाजिक न्याय की भावना को केंद्र में रखते हुए सरकार ने बाबा साहेब अंबेडकर रोजगार प्रोत्साहन योजना में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 23 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया है, जिसमें इस वर्ग तथा दिव्यांगों के लिए अधिकतम 70,000 रुपए तक सब्सिडी का प्रावधान है। सामान्य श्रेणी में यह सब्सिडी प्रति यूनिट 25 प्रतिशत या अधिकतम 50,000 रुपए है। लक्षित वित्तीय सहायता की व्यवस्था ने पात्र लाभार्थियों को आर्थिक संबल प्रदान किया है और उन्हें योजनाओं का वास्तविक लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ये सुधार समावेशी विकास और समान अवसर की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं।
शहरी विकास और आवास क्षेत्र में हुई प्रगति पर राज्यपाल ने बताया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत 36.37 लाख आवासों का निर्माण किया गया है, जो लक्ष्य का 99.49 प्रतिशत और देश में सर्वाधिक है। इसी तरह मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत अब तक 3.67 लाख आवासों का निर्माण पूरी तरह पूर्ण हो चुका है। यह उपलब्धि गरीबों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
श्रम एवं श्रमिक कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के लिए अभूतपूर्व कार्य किए गए हैं। ई-श्रम पोर्टल पर अब तक 8 करोड़ 51 लाख से अधिक श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जो इस दिशा में प्रदेश की व्यापक पहुंच को दर्शाता है। प्रधानमंत्री श्रमयोगी मानधन योजना के अंतर्गत 7,01,484 श्रमिकों को पेंशन सुरक्षा से जोड़ा गया है, जिससे श्रमिकों के भविष्य को आर्थिक संबल मिला है और उत्तर प्रदेश श्रमिक हितैषी राज्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है।