नई दिल्ली, 9 फरवरी। सनातन धर्म में पंचांग का बहुत महत्व है। यह पांच अंगों तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वारके आधार पर शुभ-अशुभ समय का निर्णय करने में मदद करता है। दृक पंचांग के अनुसार, 10 फरवरी को फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है।
यह तिथि सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगी। उसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी। वहीं, उदयातिथि के अनुसार पूरे दिन अष्टमी तिथि रहेगी। नक्षत्र की बात करें तो विशाखा नक्षत्र सुबह 7 बजकर 55 मिनट तक प्रभावी रहेगा, इसके बाद अनुराधा नक्षत्र शुरू होगा। योग ध्रुव है, जो 11 फरवरी की रात 1 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। करण कौलव सुबह 7 बजकर 27 मिनट तक है और फिर तैतिल करण शाम 8 बजकर 43 मिनट तक चलेगा।
10 फरवरी, मंगलवार को चंद्रमा वृश्चिक राशि में गोचर करेंगे। सूर्योदय सुबह 7 बजकर 4 मिनट पर और सूर्यास्त शाम 6 बजकर 7 मिनट पर होगा।
शुभ कार्यों के लिए अभिजित, विजय या अमृत काल जैसे समय चुनना बेहतर होता है। शुभ मुहूर्त की बात करें तो ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 20 मिनट से 6 बजकर 12 मिनट तक, अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से 12 बजकर 58 बजे तक, विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से 3 बजकर 10 मिनट तक और गोधूलि मुहूर्त शाम 6 बजकर 5 मिनट से 6 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात 11 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 59 मिनट तक है।
कोई शुभ या नया कार्य करने की योजना है, तो राहुकाल का विशेष ध्यान रखें। राहुकाल दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से 4 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यता है कि इस दौरान नया या शुभ कार्य करने से फलित नहीं होता। अन्य अशुभ समय में यमगंड सुबह 9 बजकर 50 मिनट से 11 बजकर 13 मिनट तक, गुलिक काल दोपहर 12 बजकर 35 मिनट से 1 बजकर 58 मिनट तक है। पंचांग के अनुसार विंछुड़ो पूरे दिन और कुछ अन्य अशुभ योग जैसे आडल योग सुबह 7 बजकर 4 मिनट से 7 बजकर 55 मिनट तक प्रभावी है।
10 फरवरी को मंगलवार है, जो माता दुर्गा, श्रीराम भक्त हनुमान और मंगल ग्रह को समर्पित है। इस दिन भक्ति-भाव से पूजा करने माता दुर्गा और श्रीराम भक्त प्रसन्न होते हैं और मंगल ग्रह शांत होते हैं।