नई दिल्ली, 7 फरवरी। भारत-अमेरिका व्यापारिक समझौते का अंतरिम ढांचा सामने आ गया है और यह दिखाता है कि भारत को अन्य देशों (पड़ोसी देशों को मिलाकर) के मुकाबले बेहतर डील मिली है।
इस ट्रेड डील से भारत-अमेरिका के बीच आपसी आर्थिक सहयोग बढ़ेगा। साथ ही, देश के एमएसएमई, छोटे कारोबारियों और कुशल कर्मचारियों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर का बड़ा बाजार खुलेगा।
भारत-यूएस व्यापारिक समझौते के तहत अमेरिका में भारतीय निर्यात पर टैरिफ 50 प्रतिशत से कम 18 प्रतिशत हो गया है।
18 प्रतिशत टैरिफ के साथ अमेरिकी बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में इजाफा होगा।
इससे भारत को अमेरिकी बाजार में उसके मजबूत सहयोगियों के मुकाबला करने में मदद मिलेगी और टैरिफ गैप कम होगा।
मौजूदा समय में अमेरिका ने यूरोप पर 15 प्रतिशत, यूके पर 10 प्रतिशत, स्विट्जरलैंड पर 15 प्रतिशत, जापान पर 15 प्रतिशत और दक्षिण कोरिया पर 15 प्रतिशत का टैरिफ लगाया गया है।
वहीं, अमेरिका ने जिन देशों पर सबसे अधिक टैरिफ लगाया हुआ है। उनमें 50 प्रतिशत के साथ ब्राजील शीर्ष पर है। इसके बाद 40 प्रतिशत के साथ म्यांमार और लाओस, 37 प्रतिशत के साथ चीन और 30 प्रतिशत के साथ दक्षिण अफ्रीका का नाम शामिल है।
अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते से सबसे बड़ा फायदा देश की टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर गुड्स और केमिकल और इंजीनियरिंग गुड्स इंडस्ट्री को होगा।
इससे लागत के मामले में प्रतिस्पर्धा कर रहे क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले भारत की स्थिति भी मजबूत होती है। यह ढांचा भारतीय वस्तुओं की एक विस्तृत श्रृंखला पर शुल्क हटाने का मार्ग भी खोलता है।
इसके अलावा, भारत पर अमेरिकी शुल्क में कमी से भारत की दर अधिकांश आसियान देशों से कम हो जाती है और चीन के मुकाबले भारत को अच्छी स्थिति प्राप्त होती है।
डीबीएस ग्रुप रिसर्च की वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा, "यह सफलता वास्तविक अर्थव्यवस्था एवं निर्यात, बाजार की भावनाओं और वित्तीय बाजारों के लिए स्पष्ट रूप से सकारात्मक है, हालांकि, विस्तृत जानकारी का इंतजार है।"
डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए टैरिफ दरों में से भारत अब चीन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश और वियतनाम जैसी अन्य एशियाई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में सबसे कम दरों वाले देशों में से एक है।