पांच साल का इंतजार बेकार! संसद में हंगामे की भेंट चढ़ा थरूर का कश्मीरी पंडितों पर बिल, सांसद निराश

संसद में हंगामे के कारण अटका कश्मीरी पंडितों के अधिकारों पर शशि थरूर का बिल


नई दिल्ली, 7 फरवरी। कश्मीरी पंडितों के अधिकारों पर कांग्रेस सांसद शशि थरूर का एक निजी सदस्य विधेयक संसद में हंगामे के कारण पेश नहीं हो सका। शनिवार को शशि थरूर ने इस पर प्रतिक्रिया दी और अपनी निराशा व्यक्त की।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "शुक्रवार को संसद में हंगामे की वजह से मुझे कश्मीरी पंडितों के अधिकारों पर एक प्राइवेट मेंबर बिल पेश करने का मौका नहीं मिला, जिसे मैंने पहली बार 2021 में ड्राफ्ट करके सबमिट किया था। तब अधिकारियों ने इसे सत्रहवीं लोकसभा के बाकी समय के लिए रोक दिया था। मैंने इसे पिछले साल अठारहवीं लोकसभा में फिर से सबमिट किया और आखिरकार पांच साल बाद शुक्रवार के लिए इसे लिस्ट किया गया था। अब इसे और इंतजार करना पड़ेगा।"

शुक्रवार को संसद की कार्यवाही 9 फरवरी तक स्थगित की गई। गौरतलब है कि इस पूरे हफ्ते संसद की कार्यवाही हंगामेदार रही। खासकर, पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की किताब को लेकर हुए विवाद ने लोकसभा को चलने नहीं दिया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को लोकसभा में बोलने नहीं दिया गया। इसी को लेकर पूरे हफ्ते विपक्ष ने सदन के अंदर हंगामा किया।

इस हफ्ते हंगामे के कारण कांग्रेस के 8 सांसदों को भी सदन की कार्यवाही से निलंबित किया गया। उनके खिलाफ लोकसभा के नियमों के उल्लंघन करने पर कार्रवाई हुई। बाद में निलंबित सांसदों के साथ राहुल गांधी ने संसद परिसर में लगातार प्रदर्शन किए। विपक्ष के सदस्यों ने भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते को लेकर भी सदन में हंगामा किया।

इस हफ्ते की कार्रवाई में एक विवाद विपक्ष के सदस्यों की तरफ से लोकसभा में सत्तापक्ष की बेल में आकर नारेबाजी को लेकर भी हुआ। आरोप है कि विपक्ष के सदस्यों ने सत्तापक्ष की बेल में आकर नारे लगाए और वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी हमला कर सकते थे।
 

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