मोतिहारी, 4 फरवरी। बिहार के पूर्वी चम्पारण जिले में युवकों को नौकरी देने के नाम पर पैसे ठगने के एक बड़े गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। आरोप है कि 'पुलिस मित्र' के नाम पर इस गिरोह के लोगों ने बेरोजगार युवाओं को सरकारी सहयोगी पद दिलाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली गई।
पूर्वी चंपारण (मोतिहारी) के पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने इस मामले के प्रकाश में आने के बाद पूरे मामले के जांच का जिम्मा एक प्रशिक्षु आईपीएस अधिकारी हेमंत के नेतृत्व में विशेष जांच दल को दे दिया है। जांच दल ने चिरैया क्षेत्र से खुद को पुलिस मित्र का प्रदेश अध्यक्ष बताकर गतिविधियां चलाने वाले को गिरफ्तार किया है। उसके पास से बोर्ड लगा एक वाहन भी बरामद किया गया है। जांच टीम में साइबर सेल के अधिकारियों को भी शामिल किया गया है।
बताया जा रहा है कि ऐसे 40 से अधिक युवकों की पहचान कर ली गई है, जिनसे इस संगठन के लोगों ने ठगी का शिकार बनाया है। पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि प्राथमिक जांच में यह बात सामने आई है कि बेरोजगार युवाओं को सरकारी सहयोगी पद दिलाने का भरोसा देकर उनसे बड़ी रकम वसूली गई। युवाओं को भरोसा दिलाते हुए यह बताया गया कि पुलिस मित्र के रूप में मानदेय पर नियुक्त किया जाएगा और भविष्य में स्थायी नियुक्ति भी हो सकती है। इस दौरान चयनित युवकों के लिए प्रशिक्षण सत्र का भी आयोजन किया गया। नियुक्ति के बाद इन्हें बजाप्ता सर्टिफिकेट प्रदान किया गया।
पुलिस अधीक्षक स्वर्ण प्रभात ने बुधवार को बताया कि प्रारंभिक अनुसंधान में इस गिरोह के अन्य जिलों में भी सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। इसी क्रम में एसआईटी द्वारा मंगलवार की देर रात मुजफ्फरपुर में छापेमारी की गई। बुधवार तड़के तक चली छापेमारी में कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और दस्तावेज जब्त किए गए हैं।
उन्होंने ठगी के शिकार बने युवकों से अपील करते हुए कहा है कि वे स्थानीय पुलिस से संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने कहा कि एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है और पूरे मामले के तह तक जाएगी।