गांधीनगर, 29 जनवरी। एक समय केवल हीरा एवं कपड़ा उद्योग के लिए विख्यात सूरत शहर आज पर्यावरण संरक्षण तथा कूड़ा निकासी के लिए समग्र देश में पथदर्शक बन रहा है। सूरत अब केवल ‘डायमंड सिटी’ के रूप में नहीं, बल्कि ‘जीरो वेस्ट सिटी’ की ओर आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार द्वारा घोषित किए गए 'अर्बन डेवलपमेंट इयर – शहरी विकास वर्ष' के अवसर पर सूरत महानगर पालिका ने आधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर के साथ 'ग्रीन ग्रोथ' को भी प्राथमिकता दी है।
विकास की बड़ी छलांग लगा रहा सूरत शहर अब पर्यावरण संरक्षण में भी देश का नेतृत्व कर रहा है। महानगर पालिका ने आगामी दो वर्ष में शहर में निकलने वाले ठोस निर्माण कार्य कूड़े (सी एण्ड डी वेस्ट) की 100 प्रतिशत रीसाइक्लिंग का लक्ष्य रखा है। ऐसी व्यवस्था की जा रही है कि शहर का कोई भी कन्स्ट्रक्शन वेस्ट डंपिंग साइट तक पहुंचने की बजाय निर्माण स्थल पर ही या प्लांट में ही रिसाइकल होकर पुनरुपयोग में लिया जाए।
सूरत महानगर पालिका द्वारा शहर के कंस्ट्रक्शन एंड डिमोलिशन वेस्ट का वैज्ञानिक ढंग से एकत्रीकरण कर उसे दोबारा उपयोग में लेने के लिए कार्यरत सी एंड डी वेस्ट रीसाइक्लिंग प्लांट अब समग्र भारत के लिए एक उदाहरणीय मॉडल बना है। यह प्रोजेक्ट शहर की साफ-सफाई के साथ पर्यावरण की रक्षा करने और प्राकृतिक संसाधन बचाने में भी योगदान दे रहा है।
निर्माण कार्य के कूड़े की 100 प्रतिशत रीसाइक्लिंग करने वाली सूरत की यह स्मार्ट पहल केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण जतन का बड़ा अभियान बनी है। इस रीसाइक्लिंग प्रक्रिया के परिणामस्वरूप हर साल 500 प्रतिशत से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड का उत्सर्जन घटता है, जो 2,50,000 किलो कोयले की बचत के समान है। इससे पत्थर और रेत जैसे प्राकृतिक संसाधनों के खनन पर बोझ कम हुआ है।
स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में समग्र भारत में सर्वाधिक अंक प्राप्त कर सूरत ने देश में फिर एक बार स्वच्छता में विशिष्ट पहचान स्थापित की है। सुपर स्वच्छ लीग में सूरत निरंतर अग्रसर रहा है और जीरो वेस्ट मैनेजमेंट की ओर दृढ़ प्रयास हो रहे हैं। सूरत मनपा, राज्य एवं केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में कूड़े की वैज्ञानिक ढंग से रीसाइक्लिंग और वेस्ट मैनेजमेंट किया जाता है। शहर में कन्स्ट्रक्शन और डिमोलिशन वेस्ट के ठोस कूड़े से बेस्ट प्रोडक्ट्स का उत्पादन करने के लिए सी एंड डी प्लांट की स्थापना की गई है।
सूरत के कोसाड में 300 मैट्रिक टन प्रतिदिन क्षमता वाला प्लांट जन-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के अंतर्गत कार्यरत है, जिसमें दैनिक अनुमानित 80 मैट्रिक टन डिमोलिशन वेस्ट रीसाइकिल होता है। इस प्रकार, सी एंड डी वेस्ट से पेवर ब्लॉक्स और विभिन्न प्रकार के कन्स्ट्रक्शन वेस्ट मटीरियल्स से उच्च गुणवत्ता के उत्पाद बनाए जाते हैं।
क्लीन सिटी सूरत में डिमोलिशन वेस्ट अब वेस्ट नहीं, बल्कि वेल्थ बन रहा है। सूरत मनपा द्वारा क्लीन कंस्ट्रक्शन गाइडलाइन लागू की गई है। ई-गवर्नेंस के माध्यम से नागरिक घर बैठे ही कंस्ट्रक्शन वेस्ट उठवाने के लिए पंजीकरण करा सकते हैं। सूरत मनपा द्वारा एक प्रेरणादायी निर्णय लिए जाने से प्लांट में निकलने वाली रिसाइकिल सामग्री को सरकारी टेंडरों में भी 20 प्रतिशत तक रिसाइकिल सामग्री का उपयोग अनिवार्य किया गया है। इस नीति से रिसाइकिल हुई वस्तुओं के बाजार को गति मिलेगी और 'सर्कुलर इकोनॉमी' मजबूत बनेगी।
सूरत मनपा द्वारा लागू क्लीन कंस्ट्रक्शन गाइडलाइन शहर के वायु प्रदूषण को घटाने में महत्वपूर्ण सिद्ध हो रही है। स्मार्ट मॉनिटरिंग के कारण नागरिकों की शिकायतों में कमी आई है और सी एंड डी की 100 प्रतिशत रीसाइक्लिंग की जाती है। कंस्ट्रक्शन साइट्स पर पतरे, शेड्स, धूल नियंत्रण के लिए स्प्रिंकलर्स और ग्रीन नेट का अनिवार्य उपयोग; ये सब मिलकर सूरत को अधिक स्वच्छ, सुरक्षित एवं सुवासित बनाते हैं।