युद्ध के मैदान (Battlefield) में हमारे वीर जवानों की सुरक्षा और उनके त्वरित उपचार की दिशा में भारत ने एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व कदम उठाया है।
'मेक इन इंडिया' की ताकत को दुनिया के सामने रखते हुए, गुरुग्राम स्थित 'एसएस इनोवेशंस इंटरनेशनल' (SS Innovations) ने "विमान" (Vimana) नामक एक अत्याधुनिक ड्रोन-आधारित सर्जिकल रोबोटिक प्रणाली का अनावरण किया है।
हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 'ग्लोबल मल्टी-स्पेशियलिटी रोबोटिक सर्जरी कॉन्फ्रेंस' (SMRSC 2026) में दुनिया के सामने पेश की गई यह स्वदेशी तकनीक उन दुर्गम और उच्च जोखिम वाले युद्ध क्षेत्रों में 'संजीवनी' बनेगी, जहां घायल जवानों को तुरंत मेडिकल मदद पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है।
क्या है 'विमान' और यह कैसे काम करता है?
सैन्य प्रौद्योगिकी (military technology) को समझना कभी-कभी जटिल हो सकता है, लेकिन 'विमान' का कॉन्सेप्ट बेहद स्पष्ट और जीवन रक्षक है। यह मानव रहित शक्तिशाली ड्रोन (UAS) और उन्नत सर्जिकल रोबोटिक्स का एक बेजोड़ संगम है।इसे ऐसे समझें: सीमा पर या किसी दुर्गम इलाके में यदि कोई जवान घायल हो जाता है, तो उसे बेस कैंप के अस्पताल तक लाने में काफी समय लगता है। इसी समय को बचाने के लिए एक शक्तिशाली 'हेवी-लिफ्ट ऑटोनॉमस ड्रोन' को घटनास्थल पर भेजा जाता है। इस ड्रोन के भीतर एक 'मिनी सर्जिकल रोबोट' मौजूद होता है।
घायल जवान के पास लैंड करने के बाद, यह रोबोट अपनी '7-डिग्री-ऑफ-फ्रीडम' (इंसानी हाथों की तरह हर दिशा में मुड़ने और काम करने में सक्षम) दो सूक्ष्म रोबोटिक भुजाएं खोलता है।
इन भुजाओं का सीधा नियंत्रण मीलों दूर किसी सुरक्षित 'SSI Mantra Surgeon Command Center' में बैठे एक विशेषज्ञ सैन्य-सर्जन के हाथों में होता है।
हाई-स्पीड और रियल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन की मदद से, वह सर्जन रोबोट की भुजाओं को बिल्कुल वैसे ही और उसी सटीकता से संचालित कर सकता है, जैसे वह खुद युद्धभूमि में मौजूद हो।
'गोल्डन आवर' में रक्षक बनेगा 'विमान'
मिलिट्री ट्रामा केयर में 'गोल्डन आवर' (चोट लगने के बाद का शुरुआती समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। अक्सर ज्यादा खून बहने या समय पर प्राथमिक शल्य चिकित्सा न मिलने से जान का खतरा बढ़ जाता है।'विमान' का मुख्य उद्देश्य इसी बहुमूल्य समय को बचाना है। दूर बैठा डॉक्टर इस रोबोट की मदद से भारी रक्तस्राव को रोक सकता है (Hemorrhage control), सीने में फंसे दबाव को कम कर सकता है (Chest decompression), श्वास नली को सुचारु कर सकता है और यहां तक कि घाव से बम या गोली के छर्रे (shrapnel) भी निकाल सकता है।
इससे घायल जवान की स्थिति तब तक स्थिर हो जाती है, जब तक कि मेडिकल इवैक्यूएशन टीम उसे एयरलिफ्ट करके बड़े अस्पताल नहीं ले जाती।
डिफेन्स और स्वास्थ्य तकनीक का महासंगम
यह प्रणाली केवल सैन्य ऑपरेशन्स तक सीमित नहीं है। आपदा प्रबंधन, औद्योगिक दुर्घटनाओं या जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में जहां भूस्खलन या खराब मौसम के कारण मेडिकल टीमों का तुरंत पहुंचना नामुमकिन होता है, यह ड्रोन-रोबोटिक तकनीक चमत्कार कर सकती है।एसएस इनोवेशंस के संस्थापक और सीईओ, विश्वविख्यात सर्जन डॉ. सुधीर श्रीवास्तव ने इस अवसर पर स्पष्ट किया कि 'विमान' का उद्देश्य सर्जिकल केयर को अस्पताल की चारदीवारी से निकालकर सीधे वहां पहुंचाना है जहां उसकी सबसे ज्यादा और सबसे जल्दी जरूरत है।
SMRSC 2026 में उपस्थित केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव ने भी इस तकनीक की सराहना करते हुए कहा कि भारत अब उन्नत चिकित्सा और डिफेन्स तकनीक में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो रहा है।
'विमान' प्रणाली केवल एक मशीन नहीं है; यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जब भारतीय विज्ञान और देशभक्ति का संगम होता है, तो हम ऐसी तकनीक का निर्माण कर सकते हैं जो सरहदों पर हमारी रक्षा करने वाले जवानों की सांसों की रक्षा कर सके।