भारत अब केवल रक्षा उपकरणों का खरीददार नहीं रहा, बल्कि वह भविष्य की सैन्य तकनीकों का सिरमौर बन रहा है।
'सागर डिफेन्स इंजीनियरिंग' (Sagar Defence Engineering) ने अपने नवीनतम मानव-रहित समुद्री जहाजों (Unmanned Surface Vessels - USV) के सफल प्रदर्शन के साथ भारत को 'ऑटोनॉमस मैरीटाइम वॉरफेयर' (स्वायत्त समुद्री युद्ध) के क्षेत्र में सबसे आगे लाकर खड़ा कर दिया है।
तकनीक को समझें: क्या है ऑटोनॉमस 'स्वार्मिंग' तकनीक?
पारंपरिक मानव-रहित नावें रिमोट कंट्रोल की मोहताज होती थीं, जहां हर नाव को एक मानव ऑपरेटर नियंत्रित करता था।लेकिन सागर डिफेन्स की 'स्वार्मिंग' तकनीक एक बहुत बड़ी तकनीकी छलांग है।
इसे आकाश में उड़ने वाले पक्षियों के एक ऐसे झुंड की तरह समझें, जो बिना आपस में टकराए एक साथ दिशा बदलता है और एक टीम की तरह काम करता है।
इस स्वार्म तकनीक में कई ऑटोनॉमस नावें एक 'वितरित नेटवर्क' (distributed network) के रूप में एक साथ काम करती हैं।
ये नावें लगातार एक-दूसरे के साथ डेटा शेयर करती हैं, अपने आस-पास के वातावरण को समझती हैं और किसी भी खतरे (जैसे दुश्मन का जहाज) को ट्रैक करके खुद सामूहिक प्रतिक्रिया तय कर सकती हैं
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसके पीछे 'जेनिसिस' (GENISYS) जैसे स्वदेशी कमांड और कंट्रोल सिस्टम का हाथ है, जो इन नावों को अपना दिमाग खुद चलाने की ताकत देता है।
यदि स्वार्म में से कोई एक नाव खराब हो जाए या दुश्मन उसे नष्ट कर दे, तब भी बाकी नावें आपस में काम बांट लेती हैं और मिशन जारी रहता है।
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब हमारे वीर नौसैनिकों को सीधे खतरे में डाले बिना ही समुद्र के विशाल हिस्सों की कड़ी निगरानी की जा सकती है।
वैश्विक नियमों और बहसों से कहीं आगे भारत
आज पश्चिमी देश और 'अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन' (IMO) अपने 'MASS' (मैरीटाइम ऑटोनॉमस सरफेस शिप्स) कोड को 2032 तक अनिवार्य रूप से लागू करने के लिए लंबी कानूनी और नियामक बहसों में उलझे हुए हैं।चालक दल से जुड़े पुराने नियमों और कड़े समुद्री कानूनों ने वहां नवाचार (innovation) की गति को धीमा कर दिया है।
इसके विपरीत, भारत का लचीला और दूरदर्शी इकोसिस्टम सागर डिफेन्स जैसी स्वदेशी कंपनियों को कागजी बहसों से निकालकर सीधे मैदान में प्रयोग करने की आजादी दे रहा है।
यही कारण है कि भारत वैश्विक मानक पूरी तरह से तय होने से पहले ही इस तकनीक में ऑपरेशनल महारत और तकनीकी परिपक्वता हासिल कर रहा है।
रणनीतिक रोडमैप और 'आत्मनिर्भर भारत' की उड़ान
इन अत्याधुनिक प्रणालियों का प्राथमिक और सबसे बड़ा ग्राहक हमारी मजबूत 'भारतीय नौसेना' है।हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय नौसेना ने iDEX-DIO पहल के तहत सागर डिफेन्स को 12 हथियारों से लैस ऑटोनॉमस बोट स्वार्म का कॉन्ट्रैक्ट भी सौंपा है।
नौसेना के बाद, भारतीय सेना इसका उपयोग नदी और तटीय क्षेत्रों में और तटरक्षक बल (Coast Guard) सर्विलांस और गश्त के लिए करेंगे।
इसके अलावा, हाल ही में पुणे में बोइंग की कंपनी 'लिक्विड रोबोटिक्स' के साथ मिलकर 'वेव ग्लाइडर' प्लेटफॉर्म के सह-विकास के लिए एक नई फैसिलिटी का उद्घाटन भी किया गया है।
यह स्पष्ट संकेत है कि अपनी सेनाओं को सशक्त करने के बाद, भारत का अगला लक्ष्य इन ऑटोनॉमस डिफेन्स तकनीकों का एक प्रमुख वैश्विक निर्यातक बनना है।
उद्योग जगत के साहसिक प्रयास और सैन्य बलों के खुले समर्थन के इस बेहतरीन तालमेल के साथ, भारत अब दुनिया के उन गिने-चुने देशों की कतार में मजबूती से खड़ा है, जो भविष्य के समुद्री युद्ध के नियम खुद लिखेंगे।