बेंगलुरु, 14 मार्च। कर्नाटक भाजपा ने शनिवार को कहा कि यदि पाकिस्तान और बांग्लादेश के नागरिकों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं, तो यह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।
बेंगलुरु में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कर्नाटक विधानसभा में विपक्ष के नेता आर अशोक ने कहा कि मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दौरान फर्जी वोटों को जोड़े जाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान और बांग्लादेश से कई लोग कर्नाटक में प्रवेश कर चुके हैं। अगर उनके नाम मतदाता सूची में शामिल हो जाते हैं, तो वे स्थायी नागरिक की तरह अधिकार हासिल कर लेंगे, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
आशोक ने बताया कि इस मुद्दे पर एक कार्यशाला में भी चर्चा हुई, जिसमें मतदाता सूची में ऐसे नाम जुड़ने से रोकने के उपायों पर विचार किया गया। उन्होंने कहा कि वह भी इस कार्यशाला में शामिल हुए थे।
मुख्यमंत्री सिद्दारमैया पर निशाना साधते हुए आशोक ने कहा कि हाल ही में मुख्यमंत्री ने खुद को समाजवादी बताते हुए जाति और परिवारवाद की राजनीति का समर्थन नहीं करने की बात कही थी, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने लोगों से अपने बेटे को राजनीतिक समर्थन देने की अपील की।
आशोक ने तंज कसते हुए कहा, “अब तक लोगों ने उनका ख्याल रखा और अब वे कह रहे हैं कि उनके बेटे का भी ख्याल रखें। अगर कुछ महीनों बाद वे पोते का भी ख्याल रखने को कहें तो क्या लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह राजशाही नहीं बन जाएगी?”
उन्होंने कहा कि पहले राजा अपने बेटों को उत्तराधिकारी घोषित कर राजकुमार बनाते थे, लेकिन अब लोकतांत्रिक व्यवस्था में भी उसी तरह की राजनीति देखने को मिल रही है।
आशोक ने कहा कि बीआर अंबेडकर ने राजशाही व्यवस्था को समाप्त कर लोकतांत्रिक प्रणाली स्थापित की थी। ऐसे में नेताओं को अपने परिवार के सदस्यों को आगे बढ़ाने के बजाय चुनाव के जरिए जनता का विश्वास हासिल करना चाहिए।
एलपीजी सिलेंडरों के दुरुपयोग के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए आवश्यक सेवाएं अनुरक्षण अधिनियम लागू किया गया है और राज्य सरकार को कालाबाजारी रोकने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।
उन्होंने लोगों से मौजूदा संकट की स्थिति में सहयोग करने की अपील की और आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ऐसे समय में भी मुद्दों का राजनीतिकरण कर रहे हैं।
आशोक ने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री खेमे की ओर से लगातार डिनर बैठकें आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आम लोग कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, जबकि सरकार के भीतर भव्य डिनर कार्यक्रम हो रहे हैं।
उन्होंने यह भी दावा किया कि कांग्रेस के कुछ नेता निजी तौर पर राज्य बजट से असंतुष्ट हैं और अनौपचारिक तौर पर इसकी कमियों पर चर्चा कर रहे हैं।