नई दिल्ली, 14 मार्च। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित 'लैंड फॉर जॉब' घोटाला (जमीन के बदले नौकरी) से जुड़े मनी लांड्रिंग के मामले में दावा किया है कि पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव के परिवार ने रिश्वत के पैसों से अचल संपत्ति खरीदी थी।
दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट मामले में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने पर सुनवाई कर रहा है। इस मामले में ईडी ने राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव, पत्नी राबड़ी देवी और बेटे तेजस्वी यादव समेत अन्य को मनी लॉन्ड्रिंग का आरोपी बनाया है। अब इस केस में ईडी ने राऊज एवेन्यू कोर्ट में अपनी दलील पूरी की है।
जांच एजेंसी ने दावा किया कि मामले में आरोप तय करने के लिए उसके पास पुख्ता सबूत मौजूद हैं। ईडी ने कोर्ट में यह भी कहा है कि साजिश के तहत पहले एके इंफोसिस्टम कंपनी के शेयर हासिल किए गए थे और बाद में कंपनी को लालू परिवार ने टेकओवर कर लिया।
ईडी (ईडी) के अनुसार, जब लालू यादव रेल मंत्री (2004-2009) थे, तब 'ग्रुप डी' की नौकरियों के बदले में लोगों से जमीनें ली गईं। इन जमीनों को अक्सर सीधे लालू परिवार के बजाय एके इंफोसिस्टम्स के नाम पर लिया गया। एके इंफोसिस्टम कंपनी अमित कात्याल की है, जिन्हें लालू यादव और तेजस्वी यादव का बेहद करीबी सहयोगी माना जाता है। 2014 में, इस कंपनी के सभी अधिकार और संपत्तियां राबड़ी देवी और मीसा भारती के नाम कर दिए गए।
मामले में ईडी की दलील पूरी होने के बाद आरोपियों की तरफ से दलील रखी जाएगी। कोर्ट ने आरोपियों को अपनी दलील रखने के लिए 23 मार्च से 30 मार्च तक का समय दिया है।
सीबीआई भी 'लैंड फॉर जॉब' घोटाला केस की जांच कर रही है। सीबीआई के अनुसार, अक्सर बाजार मूल्य से कम दरों पर और ज्यादातर नकद लेनदेन के माध्यम से लालू परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी एक कंपनी के नाम पर जमीन के टुकड़े अधिग्रहित किए गए। इसके बदले में कथित तौर पर अलग-अलग जोन में रेलवे की नौकरियां दी गईं। हालांकि, लालू परिवार अपने आप को निर्दोष बता चुका है।