ग्रेटर नोएडा, 13 मार्च। उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में डूब क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ प्राधिकरण ने सख्त कार्रवाई करते हुए बुलडोजर चलाया। शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की टीम ने ग्राम आमका और बिसरख में अभियान चलाकर करीब 15 हजार वर्ग मीटर जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया। इस जमीन की अनुमानित कीमत लगभग 30 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
कार्रवाई के दौरान डूब क्षेत्र में बनाए गए कई अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर की गई। प्राधिकरण की टीम ने आमका गांव में खसरा संख्या 295, 296, 297, 298 और 299 की जमीन पर अवैध कब्जे और निर्माण की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंचकर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। यहां कुछ कालोनाइजर डूब क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग कर कॉलोनी बसाने की कोशिश कर रहे थे। प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को बुलडोजर से गिरा दिया और पूरी जमीन को कब्जे से मुक्त करा लिया।
इस अभियान का नेतृत्व प्राधिकरण के परियोजना विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक नरोत्तम चौधरी ने किया। उनके साथ प्रबंधक रोहित गुप्ता और वर्क सर्किल-2 की टीम भी मौके पर मौजूद रही। प्राधिकरण की टीम ने दोपहर करीब दो बजे से कार्रवाई शुरू की, जो लगभग दो घंटे तक चली।
इस दौरान पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराया गया। इसके अलावा बिसरख क्षेत्र में भी डूब एरिया में किए गए निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की गई। वर्क सर्किल-3 के प्रभारी प्रभात शंकर और मैनेजर प्रशांत समाधिया की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माणाधीन तीन मकानों को ध्वस्त कर दिया। दोनों स्थानों पर कार्रवाई के दौरान प्राधिकरण के सुरक्षाकर्मी भी तैनात रहे ताकि किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने कहा कि अधिसूचित क्षेत्र में किसी भी प्रकार के अवैध निर्माण की अनुमति नहीं है। यदि कोई व्यक्ति अवैध रूप से जमीन पर कब्जा करता है या अवैध कॉलोनी विकसित करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने लोगों से अपील करते हुए कहा कि ग्रेटर नोएडा में कहीं भी जमीन खरीदने से पहले प्राधिकरण से पूरी जानकारी जरूर प्राप्त करें। उन्होंने यह भी कहा कि अवैध कॉलोनियों में निवेश करना लोगों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है, इसलिए अपनी गाढ़ी कमाई लगाने से पहले जमीन की वैधता की जांच अवश्य कर लें। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी अवैध कब्जों और निर्माण के खिलाफ इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।