मार्च से ही आग का तांडव क्यों? बढ़ता तापमान कैसे बन रहा तबाही का कारण, जानें गहरा रहस्य

मार्च की शुरुआत से ही बढ़ रही आगजनी, जानें कैसे तापमान बढ़ते ही होने लगती हैं अप्रिय घटनाएं


नई दिल्ली, 12 मार्च। देश में गर्मियों की शुरुआत अभी ठीक से नहीं हुई है, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों से आगजनी की खबरें आ रही हैं। मध्य प्रदेश, दिल्ली और नोएडा से आगजनी से भारी जान-माल का नुकसान हुआ है, लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है कि गर्मियों में तापमान बढ़ते ही आग लगने की घटनाओं में अचानक वृद्धि क्यों हो जाती है, विशेषकर उत्तर भारत में?

दरअसल, सूर्य के उत्तरायण होने के साथ ही बढ़ता पारा और झुलसाने वाली 'लू' आगजनी का मुख्य कारक बनती हैं। उच्च तापमान के कारण शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में ज्वलनशील पदार्थों का 'इग्निशन तापमान' कम हो जाता है, जिससे मामूली सी चिंगारी भी विकराल रूप ले लेती है। तो आइए विस्तार से समझते हैं कि सूर्य की बदलती स्थिति किस प्रकार बढ़ती आगजनी का उत्तरदायी कारण बनती है।"

जनवरी में मकर संक्रांति के अवसर पर सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और यहीं से उसकी उत्तरायण यात्रा आरंभ होती है। सरल शब्दों में कहें तो सूर्य का झुकाव उत्तर की ओर होने लगता है। खगोलीय दृष्टि से इस समय सूर्य पृथ्वी के अत्यंत निकट होता है, फिर भी उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इसका मुख्य कारण पृथ्वी का अपनी धुरी पर 23.5 डिग्री झुका होना है। इस झुकाव के कारण उत्तरी गोलार्ध सूर्य से दूर रहता है और सूर्य की किरणें सीधी पड़ने के बजाय तिरछी पड़ती हैं। यही वजह है कि इस दौरान दिन छोटे, रातें लंबी और मौसम सर्द होता है।

मार्च में आखिर तक सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा के बीच आ जाता है, और सूर्य की किरणों का प्रभाव भारत पर ज्यादा पड़ने लगता है। वसंत ऋतु तक आते ही दिन और रात बराबर हो जाते हैं क्योंकि सूर्य खगोलीय भूमध्य रेखा की सीध में होता है। इस समय दिन के वक्त गर्मी और रात के वक्त मौसम थोड़ा ठंडा होता है।

अप्रैल से जून के मध्य भीषण गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है, क्योंकि इस अवधि में सूर्य का उत्तरायण मार्ग सक्रिय होता है। पृथ्वी के अपनी धुरी पर झुकाव के कारण सूर्य की किरणें उत्तरी गोलार्ध पर सीधी पड़ती हैं, जिससे तापमान में भारी वृद्धि दर्ज की जाती है। इस ऋतु में 21 जून का दिन खगोलीय दृष्टि से सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि इस समय सूर्य कर्क रेखा के ठीक ऊपर होता है। दिन के समय सूरज के अधिक प्रभाव की वजह से लू की स्थिति उत्पन्न होती है।

जुलाई के महीने में सूर्य की किरणें सीधी और लंबे समय तक पड़ने से धरती तेजी से गर्म होती है, और लू के चलने की वजह से खेतों और जंगलों में आग लगने की घटनाएं ज्यादा देखी जाती हैं। इसके साथ ही, उत्तरी गोलार्द्ध में जमीन का हिस्सा ज्यादा होता है और पानी का कम। इस स्थिति में धरती किरणों से तेजी से गर्म होती है और तापमान तेजी से बढ़ने लगता है। यही कारण है कि अप्रैल से लेकर जुलाई को सबसे गर्म महीना माना जाता है, और इस दौरान बढ़ता तापमान आगजनी का प्रमुख कारण बनता है।
 

Similar threads

Trending Content

Forum statistics

Threads
15,716
Messages
15,753
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top