दांडी मार्च की सालगिरह पर PM मोदी ने किया भावपूर्ण स्मरण, साझा किया 'सत्यमेव जयते' का प्रेरणादायक संस्कृत सुभाषितम्

प्रधानमंत्री मोदी ने दांडी मार्च की वर्षगांठ पर विभूतियों को याद करते हुए शेयर किया संस्कृत सुभाषितम्


नई दिल्ली, 12 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'दांडी मार्च' की वर्षगांठ पर इसमें शामिल सभी विभूतियों को याद करते हुए एक 'संस्कृत सुभाषितम्' शेयर किया है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "1930 में आज ही के दिन दांडी मार्च की शुरुआत हुई थी। इसमें शामिल सभी विभूतियों का श्रद्धापूर्वक स्मरण।" उन्होंने 'संस्कृत सुभाषितम्' लिखा, "सत्यमेव जयति नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। येनाक्रमन्त्यृषयो ह्याप्तकामा यत्र तत्सत्यस्य परमं निधानम्॥"

इस 'सुभाषितम्' का संदेश है कि सदैव सत्य की ही विजय होती है और असत्य का नाश होता है। इसलिए उस मार्ग का अनुसरण करना चाहिए, जिस मार्ग पर चलकर ऋषियों ने आनंद और परमसत्य की प्राप्ति की।

इससे पहले, स्वतंत्रता संग्राम के महत्वपूर्ण अध्याय 'दांडी नमक सत्याग्रह' की वर्षगांठ पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत कई नेताओं ने महात्मा गांधी को याद किया।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किया, "1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी जी ने दांडी सत्याग्रह शुरू किया था, जिसने हर आयु और वर्ग के भीतर स्वतंत्रता की इच्छा को और भी प्रबल बनाया। यह स्वदेशी की दिशा में उठाया गया ऐसा कदम था, जिसने स्वाधीनता आंदोलन की दिशा बदल दी। दांडी सत्याग्रह के सभी महापुरुषों को नमन करता हूं।"

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "महात्मा गांधी ने 1930 में आज ही के दिन अंग्रेजों के अत्याचारी नमक कानून के विरोध में साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दांडी नमक सत्याग्रह की शुरुआत की थी, जिसने भारतीय स्वाधीनता संग्राम को नई दिशा दी। स्वतंत्रता संग्राम के इस महत्वपूर्ण अध्याय दांडी नमक सत्याग्रह की वर्षगांठ के अवसर पर पूज्य महात्मा गांधी और सत्याग्रहियों को विनम्र अभिवादन।"

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिखा, "पूज्य बापू और अमर संघर्ष के सभी सत्याग्रहियों को कोटि-कोटि नमन। साल 1930 में आज ही के दिन महात्मा गांधी के नेतृत्व में साबरमती आश्रम से आरंभ हुआ दांडी नमक सत्याग्रह भारतीय स्वाधीनता संग्राम की उस ज्योति का प्रज्ज्वलन था, जिसने जन-जन में आत्मबल और स्वराज का नया मंत्र भर दिया। बर्बर और अलोकतांत्रिक ब्रिटिश शासन की जड़ें हिलाने वाले इस अभूतपूर्व 'दांडी मार्च' ने यह सिद्ध किया कि सत्य, साहस और सामूहिक संकल्प से साम्राज्य भी डगमगा जाते हैं।"
 

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