नई दिल्ली, 11 मार्च। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के प्राइवेट मार्केट में निवेश के लिए तेजी से निवेशकों की 'पहली पसंद' बनता जा रहा है। जब एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई बाजारों में निवेश गतिविधियां धीमी पड़ रही हैं, ऐसे में भारत वैश्विक निवेशकों को बड़े पैमाने और स्थिरता के साथ बेहतर अवसर प्रदान कर रहा है।
मैक्किंजे एंड कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सर्वे में शामिल 50 से अधिक लिमिटेड पार्टनर्स में से करीब 31 प्रतिशत ने भारत को निवेश के लिए पहला विकल्प बताया, जबकि 76 प्रतिशत निवेशकों ने इसे अपने शीर्ष तीन निवेश विकल्पों में शामिल किया।
रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति एशिया में निवेश के रुझान में बदलाव को दर्शाती है। निवेशक अब चीन के अलावा अन्य देशों में दीर्घकालिक विकास के अवसर तलाश रहे हैं और इस कारण भारत की ओर उनका झुकाव बढ़ रहा है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आधे से अधिक निवेशक भारत-केंद्रित फंड में अपने निवेश को बढ़ाने की योजना बना रहे हैं।
वर्तमान में भारत में निवेश के लिए लिमिटेड पार्टनर्स की कुल पूंजी का करीब 64 प्रतिशत हिस्सा प्राइवेट मार्केट में जाता है। निवेशकों को उम्मीद है कि आने वाले पांच वर्षों में बायआउट और ग्रोथ स्ट्रेटेजी में सबसे ज्यादा रुचि देखने को मिलेगी, क्योंकि इनसे निवेशकों को अधिक नियंत्रण मिलता है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2021 से 2025 के बीच भारत में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल डील्स का कुल मूल्य बढ़कर 207 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले पांच वर्षों की तुलना में डेढ़ गुना से अधिक है। इसी अवधि में निवेश से बाहर निकलने यानी एग्जिट का मूल्य भी दोगुने से ज्यादा बढ़कर करीब 120 अरब डॉलर तक पहुंच गया।
सेक्टर के हिसाब से देखें तो टेक्नोलॉजी, आईटी और फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मास्यूटिकल्स और हेल्थकेयर तथा कंज्यूमर सेक्टर में सबसे ज्यादा निवेश हुआ। इन चार सेक्टरों ने इस अवधि में कुल प्राइवेट निवेश का करीब तीन-चौथाई हिस्सा आकर्षित किया।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में प्राइवेट इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश में भारत की हिस्सेदारी 2020-24 के दौरान करीब 21 प्रतिशत तक पहुंच गई, जबकि 2015-19 के दौरान यह लगभग 12 प्रतिशत थी।
प्राइवेट इक्विटी फर्म पैंथियन के पार्टनर कुणाल सूद ने कहा कि निवेशक अब प्राइवेट मार्केट में पहले से अधिक भरोसे के साथ निवेश कर रहे हैं और वे कंपनियों के साथ गहरी और रणनीतिक साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि निवेशकों के लिए भारत के बढ़ते आकर्षण का मुख्य कारण देश की मजबूत आर्थिक वृद्धि, उद्यमशील प्रतिभा और तेजी से बढ़ती घरेलू खपत है, जो आने वाले वर्षों में भी निवेश के लिए बड़े अवसर पैदा कर सकती है।