बीजिंग, 10 मार्च। चीनी जन राजनीतिक सलाहकार सम्मेलन (सीपीपीसीसी) के सदस्य और शीत्सांग (तिब्बत) स्वायत्त प्रदेश के लोका प्रिफेक्चर के कला मंडल के गायन कलाकार डालो लंबे समय से जमीनी स्तर के कला समूहों के पेशेवर स्तर को उन्नत करने पर ध्यान दे रहे हैं। इस वर्ष आयोजित “दो सत्र” के दौरान उन्होंने इस विषय से संबंधित अपना सुझाव भी प्रस्तुत किया।
डालो ने कहा कि नए युग में जातीय कला को केवल मंचीय प्रदर्शन तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, विभिन्न क्षेत्रों और विभिन्न जातियों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मज़बूत करना आवश्यक है। साथ ही अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी शीत्सांग की कहानी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत की जानी चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग वास्तविक शीत्सांग, निरंतर विकसित हो रहे शीत्सांग तथा खुशहाल और सामंजस्यपूर्ण शीत्सांग को समझ और देख सकें।
डालो ने अपने शोध के आधार पर बताया कि कम आबादी वाले जातीय क्षेत्रों में सांस्कृतिक और कलात्मक प्रतिभाओं की कमी तथा पेशेवर स्तर अपेक्षाकृत निम्न होने जैसी समस्याएँ अभी भी मौजूद हैं। इसी कारण इस वर्ष के “दो सत्र” में उन्होंने जमीनी स्तर पर कला प्रतिभाओं के व्यवस्थित प्रशिक्षण और कला दलों के सुदृढ़ निर्माण को बढ़ावा देने का सुझाव दिया, ताकि इन क्षेत्रों में सांस्कृतिक गतिविधियों की गुणवत्ता और प्रभाव दोनों में सुधार हो सके।
इसके अलावा, डालो ने यह भी सुझाव दिया कि कम आबादी वाली जातियों की गैर-भौतिक सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे पारंपरिक जातीय सांस्कृतिक उत्पादों की बाजार प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी और उनसे मिलने वाले आर्थिक लाभ में भी वृद्धि होगी।
(साभार- चाइना मीडिया ग्रुप, पेइचिंग)