मोरबी, 10 मार्च। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष से गैस और तेल संकट ने दुनिया की इकॉनमी पर असर डाला है। गैस संकट की वजह से मोरबी सिरेमिक इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर है। सिरेमिक एसोसिएशन के प्रेसिडेंट मनोजभाई ने बताया कि अब तक 100 यूनिट बंद हो चुकी हैं और आने वाले दिनों में प्रोपेन गैस इस्तेमाल करने वाली सभी यूनिट बंद करनी पड़ेंगी। नैचुरल गैस की सप्लाई में भी अनिश्चितता है। सिरेमिक इंडस्ट्री लगातार प्रोडक्शन करती रहती है और अगर गैस सप्लाई रुकी तो फैक्ट्री बंद करनी पड़ेंगी।
एक दिन पहले 9 मार्च को विपक्ष ने सरकार से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर चर्चा की मांग की। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों ने कहा कि यह मुद्दा सीधे देश के आम लोगों और भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर रहा है, इसलिए इस पर संसद में गंभीर बहस जरूरी है।
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि मौजूदा हालात की गंभीरता और पूरे क्षेत्र पर उसके असर को देखते हुए संसद में इस विषय पर चर्चा कराना बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव पेश किया है, ताकि सदन में तुरंत चर्चा हो सके। पार्टी लोकसभा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव भी लेकर आई है, लेकिन फिलहाल सबसे जरूरी मुद्दा देश के आम लोगों पर पड़ रहा असर है।
कांग्रेस नेता शशि थरूर ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए कहा था कि संसद का मूल उद्देश्य ही देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना है। अगर संसद में ऐसे मामलों पर चर्चा नहीं होगी तो फिर संसद की अहमियत ही क्या रह जाएगी। थरूर ने बताया था कि मध्य पूर्व में तनाव के कारण भारत की ऊर्जा सुरक्षा प्रभावित हो रही है।
शशि थरूर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है और कतर से गैस की आपूर्ति भी फिलहाल बंद हो गई है, क्योंकि वहां ‘फोर्स मेज्योर’ घोषित कर दिया गया है। हमारी फैक्ट्रियों में अभी उस तरफ से गैस नहीं आ रही है। आप ईस्ट से ले सकते हैं, इसलिए हम कुछ सप्लाई लेने की कोशिश करेंगे,लेकिन हम निश्चित रूप से परेशान हैं।