पीएम मोदी का आह्वान: शिक्षा-कौशल को रोजगार-उद्यम से जोड़ना ही समय की जरूरत, जनता के सपनों को मिलेगी उड़ान

बजट वेबिनार में पीएम मोदी बोले, शिक्षा को रोजगार और उद्यम से जोड़ना समय की जरूरत


नई दिल्ली, 9 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को बजट-पश्चात वेबिनार शृंखला के चौथे सत्र को संबोधित किया। इस वेबिनार की थीम “सबका साथ, सबका विकास – जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति” रही। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस वर्ष के बजट का मूल उद्देश्य देशवासियों की आकांक्षाओं को पूरा करना है और सरकार उसी दिशा में काम कर रही है।

प्रधानमंत्री ने वेबिनार में शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पर्यटन, खेल और संस्कृति जैसे क्षेत्रों को देश के समग्र विकास का प्रमुख आधार बताया। उन्होंने विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं से बजट में की गई घोषणाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने के लिए सुझाव देने का आग्रह किया।

पीएम मोदी ने कहा, “जनता की आकांक्षाओं की पूर्ति मात्र एक विषय नहीं है, यह इस बजट का मूल उद्देश्य और इस सरकार का संकल्प है।”

प्रधानमंत्री ने निवारक और समग्र स्वास्थ्य की परिकल्पना पर जोर देते हुए स्वास्थ्य अवसंरचना के तेजी से सुदृढ़ीकरण और योग एवं आयुर्वेद की वैश्विक लोकप्रियता का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बताया कि सैकड़ों जिलों में मेडिकल कॉलेज खोले गए हैं। आयुष्मान भारत योजना और आरोग्य मंदिरों के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच का विस्तार हुआ है।

पीएम मोदी ने विशेष रूप से उभरती 'देखभाल अर्थव्यवस्था' और वैश्विक स्तर पर देखभालकर्ताओं की बढ़ती मांग की ओर ध्यान आकर्षित किया और विशेषज्ञों से युवाओं को सशक्त बनाने के लिए नए प्रशिक्षण मॉडल विकसित करने का आग्रह किया। पीएम ने कहा, "मैं इस वेबिनार में उपस्थित स्वास्थ्य सेक्टर के विशेषज्ञों से नए प्रशिक्षण मॉडल और साझेदारियों को विकसित करने के लिए सुझाव देने का आग्रह करूंगा ताकि देश में प्रशिक्षण व्यवस्था और भी मजबूत हो सके।"

डिजिटल हेल्थ के क्षेत्र में टेलीमेडिसिन की बढ़ती भूमिका का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इससे दूरदराज के इलाकों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना संभव हुआ है। हालांकि उन्होंने इसके बारे में जनजागरूकता बढ़ाने और इसे और सरल बनाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, "मेरा मानना है कि अभी टेलीमेडिसिन के बारे में जागरूकता और इसके उपयोग को सरल बनाने की आवश्यकता है।"

प्रधानमंत्री ने भारत के युवाओं की विकसित होती सोच को देश की सबसे बड़ी शक्ति बताते हुए इसकी सराहना की और इस भावना के अनुरूप शिक्षा प्रणाली की आवश्यकता पर बल दिया। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि देश में शिक्षा को रोजगार और उद्यम से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं की सोच तेजी से बदल रही है और शिक्षा प्रणाली को भी उसी अनुरूप ढालना होगा। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति का उद्देश्य शिक्षा को रोजगार और उद्यम से जोड़ना है। साथ ही उन्होंने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ऑटोमेशन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने की जरूरत बताई।

पीएम मोदी ने एवीजीसी यानी एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स सेक्टर को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों से अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान आधारित शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने का आह्वान किया, ताकि छात्रों को वास्तविक दुनिया का अनुभव मिल सके।

उन्होंने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पर संतोष जताया और कहा कि भविष्य की तकनीकों में बेटियों को समान अवसर देने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। साथ ही उन्होंने मजबूत अनुसंधान इकोसिस्टम बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिससे युवा शोधकर्ताओं को नवाचार और प्रयोग करने के लिए बेहतर अवसर मिल सकें।

पीएम मोदी ने कहा, "मैं आप सभी से आग्रह करता हूं कि इस वेबिनार में, अपने परिसरों को उद्योग सहयोग और अनुसंधान-आधारित शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर विचार-विमर्श अवश्य करें।"

प्रधानमंत्री ने विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित (एसटीईएम) क्षेत्रों में महिलाओं की बढ़ती संख्या पर गर्व व्यक्त किया और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में बेटियों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। पीएम मोदी ने एक सशक्त अनुसंधान इकोसिस्टम बनाने का आह्वान किया जो युवा शोधकर्ताओं को बिना किसी बाधा के नवाचार और प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित करे। उन्होंने कहा, "हमें एक ऐसा अनुसंधान इकोसिस्टम बनाना होगा जहां युवा शोधकर्ताओं को नए विचारों पर प्रयोग करने और काम करने का पूरा अवसर मिले।"

खेलों की बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वस्थ और अनुशासित युवा आबादी ही राष्ट्रीय शक्ति की रीढ़ है। उन्होंने 'खेलो इंडिया' के प्रभाव को रेखांकित किया और छोटे शहरों एवं क्षेत्रों से भी प्रतिभाओं की पहचान करने, खेल निकायों को पेशेवर बनाने और राष्ट्रमंडल खेलों तथा ओलंपिक बोली जैसी आगामी प्रतियोगिताओं की तैयारी के लिए खिलाड़ियों को सुव्यवस्थित वित्तीय सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

पीएम मोदी ने कहा, "ऐसी स्थिति में, हमें आज ही युवा खिलाड़ियों की पहचान करके उन्हें प्रशिक्षित करना होगा, तभी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत की ख्याति बढ़ेगी।"

प्रधानमंत्री ने पर्यटन और संस्कृति में रोजगार सृजन की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक स्थलों से परे नए पर्यटन स्थलों का विकास किसी शहर की ब्रांडिंग और समग्र विकास को बढ़ावा देता है। प्रधानमंत्री ने कहा, "अब हम देश में पर्यटन स्थलों को नए सिरे से विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।"

प्रधानमंत्री ने जोर देते हुए कहा, "प्रशिक्षित गाइड, आतिथ्य कौशल, डिजिटल संपर्क और सामुदायिक भागीदारी हमारे पर्यटन सेक्टर के स्तंभ बन रहे हैं। इनके साथ-साथ स्वच्छता और सतत विकास पद्धतियां भी आवश्यक हैं। भारत की स्थिति को एक वैश्विक पर्यटन स्थल के रूप में सुदृढ़ करने के लिए हम मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे में पर्यटन और संबंधित क्षेत्रों पर आपके सुझाव अत्यंत महत्वपूर्ण होंगे।"

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के समापन में राष्ट्रीय प्रगति को गति देने के लिए संस्थानों, उद्योग और शिक्षा जगत के बीच समन्वय के महत्व पर जोर दिया और विश्वास व्यक्त किया कि ये चर्चाएं भविष्य के लिए एक ठोस रूपरेखा प्रदान करेंगी और विकसित भारत की नींव को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा, "ऐसे प्रयासों से विकसित भारत की नींव और भी सुदृढ़ होगी।"
 

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