मध्य प्रदेश: नीमच के युवा ने प्राकृतिक सामग्री से पीएम मोदी और मां की पेंटिंग उकेरी

मध्य प्रदेश: नीमच के युवा ने प्राकृतिक सामग्री से पीएम मोदी और मां की पेंटिंग उकेरी


नीमच, 9 मार्च। आधुनिक कला के दौर में जहां महंगे कैनवास और रासायनिक रंगों का इस्तेमाल आम हो गया है, वहीं मध्य प्रदेश के नीमच जिले के एक युवा कलाकार ने पूरी तरह देसी और पर्यावरण अनुकूल सामग्री से एक अनोखी पेंटिंग बनाकर लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

नीमच जिले के कुचड़ोद गांव निवासी चित्रकार राहुल देव लोहार ने पारंपरिक और प्राकृतिक संसाधनों की मदद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी मां की पेंटिंग तैयार की है। खास बात यह है कि इस कलाकृति में न तो महंगे कैनवास का उपयोग किया गया है और न ही किसी रासायनिक रंग का।

राहुल ने पेंटिंग के लिए जूट की बोरी (टाट) का इस्तेमाल किया। सबसे पहले बोरी को साफ कर उस पर गाय के गोबर और मेथी दानों का गाढ़ा लेप लगाया गया। यह लेप सूखने के बाद एक मजबूत और प्राकृतिक कैनवास में बदल गया, जिस पर उन्होंने बारीकी से चित्रकारी की। आमतौर पर कलाकार खुरदरे आधार पर काम करने से बचते हैं, लेकिन राहुल ने इसे ही अपनी कला की खास पहचान बना ली।

इस पेंटिंग में इस्तेमाल किए गए रंग भी पूरी तरह प्राकृतिक हैं। विभिन्न फूलों की पंखुड़ियों को पीसकर और पेड़ों की हरी पत्तियों के रस से रंग तैयार किए गए। इन्हीं रंगों से प्रधानमंत्री मोदी और उनकी माताजी का चित्र उकेरा गया है, जिसमें सादगी और भावनात्मक जुड़ाव साफ झलकता है।

राहुल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए बताया कि वे पिछले 15 वर्षों से चित्रकला के क्षेत्र में लगातार काम कर रहे हैं और उनकी कला समाज व प्रकृति से जुड़ी रहती है। उन्होंने कहा, “मैंने प्राकृतिक रंग खुद तैयार किए हैं। गाय के गोबर, मेथी दाना और मिट्टी के मिश्रण से लेप बनाकर जूट के बोरे पर कैनवास तैयार किया और उसी पर यह चित्र बनाया।”

राहुल का कहना है कि इस कलाकृति के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि कला महंगे साधनों की मोहताज नहीं होती। स्वदेशी और लोकल फॉर वोकल अभियान की भावना से प्रेरित होकर उन्होंने यह प्रयोग किया है, जो पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश देता है।

बता दें कि राहुल देव लोहार इससे पहले भी अपनी अनूठी चित्रकारी के कारण चर्चा में रह चुके हैं। कोरोना काल के दौरान उनकी कलाकृतियों के लिए उनका नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज किया गया था। ग्रामीण पृष्ठभूमि से निकलकर इस तरह के नवाचार ने उनकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है।
 

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