पंजाब बजट पर कांग्रेस MLA बाजवा का तीखा वार: "महज़ घोषणाओं का पुलिंदा, राज्य की अर्थव्यवस्था से खिलवाड़"

पंजाब का बजट महज़ घोषणाओं का पुलिंदा है: कांग्रेस विधायक प्रताप बाजवा


चंडीगढ़, 8 मार्च। पंजाब विधानसभा में विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा ने रविवार को वित्त मंत्री हरपाल चीमा द्वारा पेश किए गए बजट की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह बजट सुर्खियां बटोरने के उद्देश्य से की गई बड़ी-बड़ी घोषणाओं का एक पुलिंदा मात्र है, जबकि राज्य की संघर्षरत अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की तत्काल आवश्यकता को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है।

बाजवा ने कहा कि बजट एक बार फिर रोजगार सृजन, उद्योग को पुनर्जीवित करने या राज्य की वित्तीय स्थिति में सुधार करने के लिए आम आदमी सरकार की स्पष्ट आर्थिक दृष्टि के अभाव को उजागर करता है।

बाजवा ने एक बयान में कहा कि आप सरकार ने बड़े-बड़े दावे करने और बड़ी-बड़ी घोषणाएं करने में महारत हासिल कर ली है, लेकिन जब आर्थिक पुनरुद्धार और रोजगार सृजन के लिए ठोस योजना पेश करने की बात आती है, तो बजट पूरी तरह खोखला साबित होता है।

सरकार के इस दावे पर आपत्ति जताते हुए कि सभी वादे पूरे कर दिए गए हैं, कांग्रेस नेता बाजवा ने बताया कि 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान आम आदमी सरकार द्वारा किया गया सबसे प्रमुख वादा महिलाओं के लिए 1000 रुपये प्रति माह का था, जिसकी घोषणा सत्ता में आने के चार साल बाद अब की गई है।

उन्होंने कहा कि अगर सरकार का दावा है कि सभी वादे पूरे कर दिए गए हैं, तो पंजाब की महिलाओं को 1000 रुपए की योजना के लिए चार साल तक इतना लंबा इंतजार क्यों करना पड़ा? इससे साफ पता चलता है कि यह घोषणा राजनीतिक रूप से प्रेरित है, न कि जिम्मेदार शासन का परिणाम।

उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) सरकार के शासनकाल में पंजाब के कर्ज में हुई चिंताजनक वृद्धि पर भी प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि जब आम आदमी पार्टी सत्ता में आई थी, तब राज्य का कर्ज लगभग 28 लाख करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर लगभग 41 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जिससे राज्य के भविष्य पर भारी वित्तीय बोझ पड़ रहा है।

बाजवा ने कहा कि कर्ज कम करने और राजस्व बढ़ाने के बजाय, आम आदमी पार्टी सरकार लापरवाह वित्तीय प्रबंधन और लोकलुभावन घोषणाओं के माध्यम से पंजाब को कर्ज के जाल में और भी गहरे धकेल रही है।

विपक्ष के नेता ने आगे कहा कि बजट में पंजाब के युवाओं के लिए वास्तविक निवेश आकर्षित करने या स्थायी रोजगार सृजित करने की कोई विश्वसनीय रणनीति नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार हजारों करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त करने का दावा तो करती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि इनमें से कितने प्रस्ताव वास्तव में जमीनी स्तर पर उद्योगों में परिवर्तित हुए हैं।
 

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