अल-फलाह चेयरमैन की अंतरिम जमानत को ED की चुनौती, गवाहों को प्रभावित करने और कोर्ट गुमराह करने का आरोप

अल-फलाह चेयरमैन को अंतरिम जमानत मिलने पर गवाहों को प्रभावित करने का खतरा


नई दिल्ली, 8 मार्च। अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी को बीमार पत्नी की देखभाल के लिए दी गई दो सप्ताह की अंतरिम जमानत को ईडी चुनौती देने की तैयारी में है। एजेंसी को आशंका है कि उन्हें यह राहत मिलने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं। मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की जानी है।

ईडी का मानना है कि शनिवार को अंतरिम जमानत देते समय ट्रायल कोर्ट ने एजेंसी की दलीलों पर पर्याप्त विचार नहीं किया।

संघीय जांच एजेंसी यह भी दलील देने की तैयारी में है कि सिद्दीकी ने ट्रायल कोर्ट को यह कहकर गुमराह किया कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में रहने वाले उनके तीन बच्चे दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में कैंसर से जूझ रही अपनी मां की देखभाल के लिए भारत नहीं आ सकते।

सिद्दीकी को ईडी ने 18 नवंबर 2025 को धनशोधन मामले में गिरफ्तार किया था। यह मामला समूह की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा मान्यता से जुड़े कथित फर्जी दावों और वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है।

हरियाणा के Faridabad में स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय उस जांच के दायरे में आया, जो 10 नवंबर 2025 को हुए Red Fort blast से जुड़े कथित “व्हाइट कॉलर टेरर” नेटवर्क की जांच के तहत की जा रही थी।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शीतल चौधरी प्रधान ने 1 लाख रुपए के जमानती बॉन्ड पर सिद्दीकी को अंतरिम जमानत दी, ताकि वह अपनी पत्नी की देखभाल कर सकें।

अदालत ने सिद्दीकी के इस तर्क को स्वीकार किया कि उनकी बेटी अफिया सिद्दीका और बेटे अफहम अहमद सहित उनके बच्चे ईरान में जारी संघर्ष के कारण उड़ानों में व्यवधान के चलते भारत नहीं आ पा रहे हैं।

ईडी के वकील ने मानवीय आधार पर मांगी गई अंतरिम जमानत का विरोध करते हुए कहा कि उन्हें न्यायिक हिरासत से रिहा करने पर वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं।

जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया कि सिद्दीकी की पत्नी की चिकित्सा स्थिति स्थिर है और वह 2024 से उपचाराधीन हैं।

इससे पहले ईडी ने दिल्ली की एक अदालत को बताया था कि विश्वविद्यालय ने कथित रूप से “झूठे दावों” के जरिए छात्रों को प्रवेश दिलाकर लगभग 45 करोड़ रुपये की अपराध आय (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) अर्जित की।

जनवरी में एजेंसी ने मामले में चार्जशीट दाखिल करते समय विश्वविद्यालय से जुड़ी 139.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां भी कुर्क की थीं।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि संस्थागत धन को परिवार नियंत्रित संस्थाओं के माध्यम से घुमाया गया और सिद्दीकी के परिवार के सदस्यों के पक्ष में विदेशी प्रेषण भी किए गए।

सिद्दीकी के खिलाफ दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 27 जनवरी को दर्ज दो एफआईआर के संबंध में एक अलग मामला भी दर्ज किया है। उन पर यूजीसी की शिकायत के आधार पर धोखाधड़ी और अन्य संबंधित अपराधों के आरोप लगाए गए हैं। वह एक अन्य आपराधिक मामले में अभी भी न्यायिक हिरासत में हैं।
 

Forum statistics

Threads
14,748
Messages
14,785
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top