राजस्थान के नीमकाथाना में बीमार मादा लेपर्ड ने मचाया हड़कंप, 22 घंटे बाद खेतों से सुरक्षित निकाला गया

राजस्थान: नीमकाथाना के खेतों में घुसे बीमार मादा लेपर्ड का 22 घंटे बाद सफल रेस्क्यू


सीकर, 7 मार्च। राजस्थान के सीकर जिले के नीमकाथाना इलाके में एक बीमार मादा लेपर्ड ने ग्रामीणों में दहशत फैला दी थी।

शुक्रवार दोपहर करीब तीन बजे महावा गांव की दुर्गा वाली ढाणी में पुरणमल शर्मा के घर के पीछे लेपर्ड घुस आया। ग्रामीणों ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद टीम मौके पर पहुंची। लेकिन लेपर्ड कांटेदार झाड़ियों में छिप गया, जिससे रेस्क्यू में काफी मुश्किल हुई। शाम होने के कारण शुक्रवार को ऑपरेशन पूरा नहीं हो सका।

शनिवार सुबह से ही मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। लेपर्ड खेतों की फसलों में घुस गया और जोर-जोर से दहाड़ते हुए इधर-उधर चक्कर लगाता रहा। कई बार वह लड़खड़ाते हुए दिखा, फिर कांटेदार झाड़ियों में छिप गया। जयपुर से चिड़ियाघर की रेस्क्यू टीम के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. अशोक कुमार मौके पर पहुंचे। टीम ने खेत में पिंजरा लगाकर रेस्क्यू की तैयारी की।

जब टीम लेपर्ड को पकड़ने की कोशिश कर रही थी, तो वह अचानक उठकर वनकर्मियों पर हमला करने की कोशिश करने लगा। वनकर्मी जान बचाकर इधर-उधर भागे। पहले बिना बेहोश किए रेस्क्यू करने की कोशिश की गई, लेकिन लेपर्ड लगातार आक्रामक था। डॉ. अशोक कुमार ने हल्की डोज से ट्रेंक्यूलाइज किया, जिससे उसे काबू में किया जा सका। कुल 22 घंटे की मशक्कत के बाद लेपर्ड को सफलतापूर्वक पकड़ा गया।

डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि यह करीब ढाई साल की मादा लेपर्ड है। इसमें न्यूरोलॉजिकल समस्या के लक्षण दिख रहे हैं, जिसकी वजह से वह बीमार और असंतुलित लग रही थी। इसी कारण वह आक्रामक व्यवहार कर रही थी और चलने में भी दिक्कत हो रही थी। लेपर्ड को इलाज के लिए जयपुर के नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क के रेस्क्यू सेंटर भेजा जाएगा। वहां उसका पूरा इलाज होगा और स्वस्थ होने के बाद जंगल में छोड़ा जाएगा।

इस सफल रेस्क्यू से स्थानीय लोगों में राहत की सांस आई है। वन विभाग की टीम ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए त्वरित कार्रवाई की, जिसकी सराहना की जा रही है।
 

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