पुरी, 7 मार्च। ओडिशा के पद्मश्री पुरस्कार विजेता और प्रसिद्ध सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक ने कंटेम्पररी वेनिस 2026 की 18वीं प्रदर्शनी में भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले अकेले भारतीय कलाकार हैं।
प्रदर्शनी का आयोजन पैलेजो अल्ब्रिजी-कैपेलो, विनीशिया में किया गया और इसे इट्सलिक्विड ग्रुप ने एसीईआईटी वेनिस—इटालियन-जर्मन कल्चरल एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित किया गया।
इस प्रदर्शनी का आयोजन लुका कुरची की देखरेख में हुआ है। इसमें दुनिया के 30 से अधिक देशों के लगभग 80 कलाकार अपने कला कार्यों के माध्यम से भाग ले रहे हैं।
सुदर्शन पटनायक ने पहली बार इस अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी में अपनी “जुगलबंदी” पेंटिंग्स पेश कीं। यह श्रृंखला प्राकृतिक रेत और रंग को कैनवास पर मिलाकर बनाई गई है। उनके ये मिश्रित कला कार्य उनके कला जीवन की यात्रा का प्रतीक हैं, उनके शुरुआती पेंटिंग शौक से लेकर दुनिया भर में प्रसिद्ध सैंड स्कल्प्चर तक।
इन पेंटिंग्स में प्रकृति, मानव भावनाएं, पर्यावरणीय संतुलन और मानवता-धरती के बीच सामंजस्य को दर्शाया गया है।
पिछले पांच वर्षों में पटनायक ने रेत और पेंट का संयोजन करते हुए मिक्स्ड-मीडिया कला विकसित की है। इससे रेत की अस्थायी प्रकृति और कैनवास की स्थायीता का अनोखा मिश्रण सामने आता है। मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और नई दिल्ली में उनकी हाल की प्रदर्शनी को दर्शकों और कला प्रेमियों से उत्साही प्रतिक्रिया मिली है।
उद्घाटन समारोह में पटनायक की पेंटिंग्स ने दर्शकों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों का ध्यान खींचा। क्यूरेटर लुका कुरची और इट्सलिक्विड ग्रुप के निदेशक ने उनकी “जुगलबंदी” पेंटिंग्स की खास तारीफ की।
इन कलाकृतियों के माध्यम से सुदर्शन पटनायक ने यह संदेश दिया कि प्रकृति की सुंदरता और मानवता की जिम्मेदारी गहराई से जुड़ी हैं। उनकी कला दर्शकों को यह याद दिलाती है कि रचनात्मकता पर्यावरणीय जागरूकता, सांस्कृतिक सामंजस्य और वैश्विक जिम्मेदारी का एक शक्तिशाली माध्यम बन सकती है।
बता दें कि सुदर्शन पटनायक ने ओडिशा के पुरी स्थित नीलाद्री बीच पर अक्सर रेत की कलाकृतियां बनाते हैं। उनकी कलाकृतियां दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। पिछले साल क्रिसमस के मौके पर उन्होंने "विश्व की सबसे बड़ी सांता क्लॉस की रेत कलाकृति" बनाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड सफलतापूर्वक स्थापित किया था।